रांची: रिम्स जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने डीन को ज्ञापन सौंपकर जूनियर रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट और असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए दिन में दो बार फेस अटेंडेंस को वेतन-स्टाइपेंड भुगतान से जोड़ने के प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया है, और मांग रखी है कि तय ड्यूटी घंटे, स्टाफ की कमी और सुविधाओं की अनदेखी करके यह व्यवस्था लागू न की जाए.
क्या है पूरा मामला?
पिछले हफ्ते स्वास्थ्य विभाग ने रिम्स समेत राज्य के छह मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की फेस बायोमेट्रिक हाजिरी दिन में दो बार दर्ज कराने और उसी हाजिरी के आधार पर वेतन भुगतान करने की योजना बनाई थी. इसी प्रस्ताव पर अब जूनियर डॉक्टर भड़क गए हैं. JDA ने ज्ञापन में साफ लिखा कि उन्हें अटेंडेंस पर नजर रखने और पारदर्शिता से कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन उनका कहना है कि यह व्यवस्था तय ड्यूटी घंटे, आराम का समय, पहले से मौजूद कामकाज का बोझ, स्टाफ और फैकल्टी की कमी, और अस्पताल में मौजूद सुविधाओं को अनदेखा करके लागू नहीं की जा सकती.
समय पर वेतन और बराबरी की मांग
एसोसिएशन ने मांग रखी कि वेतन-स्टाइपेंड समय पर और बिना रुकावट मिले. साथ ही इमरजेंसी, रात और एक्सटेंडेड ड्यूटी दर्ज करने के लिए एक साफ-सुथरा सिस्टम बने. JDA का कहना है कि जो भी नियम बने, वो सभी कैडर पर बराबर लागू हो, किसी एक वर्ग को निशाना बनाकर नहीं.
फिलहाल फैसला टालने की मांग
JDA ने सीधी मांग की है कि जब तक ये सारी बातें साफ नहीं होतीं, तब तक प्रस्तावित व्यवस्था, खासकर वेतन से इसका जुड़ाव, रोक दिया जाए. एसोसिएशन ने यह भी सवाल उठाया कि सिर्फ जूनियर रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट और असिस्टेंट प्रोफेसर को ही इस दायरे में क्यों लाया जा रहा है, इसका नियम क्या है? JDA ने असल कार्य-घंटों की जांच और रेजिडेंट प्रतिनिधियों के साथ सीधी बातचीत की भी मांग की है. JDA ने ज्ञापन में लिखा “हम जवाबदेही के खिलाफ नहीं हैं, हम चुनिंदा जवाबदेही के खिलाफ हैं.”

