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    Home»झारखंड»इंटर के बाद एडमिशन की टेंशन, रांची यूनिवर्सिटी में 4 हजार सीटें घटने की आशंका
    झारखंड

    इंटर के बाद एडमिशन की टेंशन, रांची यूनिवर्सिटी में 4 हजार सीटें घटने की आशंका

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyJune 1, 2026Updated:June 1, 2026No Comments4 Mins Read2
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    Ranchi : इंटरमीडिएट का रिजल्ट आने के बाद अब हजारों छात्र-छात्राओं की नजर ग्रेजुएशन में नामांकन पर टिकी है। हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी रांची विश्वविद्यालय के कॉलेजों में दाखिला लेना चाहते हैं। लेकिन इस बार एडमिशन की राह पहले से ज्यादा मुश्किल हो सकती है। वजह है राज्य सरकार की ओर से लागू किया जा रहा क्लस्टर सिस्टम, जिसके कारण स्नातक स्तर की सीटों में 10 से 15 प्रतिशत तक की कटौती होने की संभावना है।

    अभी तक शुरू नहीं हुई नामांकन प्रक्रिया

    रांची विश्वविद्यालय के अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों में अभी तक नामांकन प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन क्लस्टर सिस्टम लागू होने का इंतजार कर रहा है। नए सिस्टम के तहत सीटों का निर्धारण होने के बाद ही एडमिशन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस देरी के कारण विद्यार्थी भी असमंजस में हैं। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि इस बार कॉलेजों में कितनी सीटें उपलब्ध होंगी और दाखिले की प्रक्रिया कब शुरू होगी।

    40 हजार से घटकर 36 हजार हो सकती हैं सीटें

    वर्तमान में रांची विश्वविद्यालय के अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों में स्नातक स्तर पर करीब 40 हजार सीटों पर नामांकन होता है। लेकिन क्लस्टर सिस्टम लागू होने के बाद यह संख्या घटकर लगभग 36 हजार तक पहुंच सकती है। यानी हजारों सीटें कम हो जाएंगी और सीमित सीटों के लिए छात्रों के बीच मुकाबला और कड़ा होगा। ऐसे में अच्छे अंक लाने वाले विद्यार्थियों को भी अपनी पसंद के कॉलेज और विषय में दाखिला पाने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।

    क्यों घट रही हैं सीटें

    दरअसल, अब सीटों का निर्धारण शिक्षकों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किया जाएगा। अभी कई कॉलेज जरूरत से ज्यादा सीटों पर नामांकन लेते रहे हैं, जिससे कक्षाओं में छात्रों की संख्या बढ़ जाती है और शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कॉलेज में इतिहास विषय में अभी 150 सीटों पर एडमिशन होता है, तो क्लस्टर सिस्टम लागू होने के बाद यह संख्या घटकर 120 तक रह सकती है।

    डीएसपीएमयू में पहले से लागू है यही व्यवस्था

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में इसी मॉडल पर नामांकन की प्रक्रिया चल रही है। राज्य सरकार की ओर से तय सीटों के अनुसार पारंपरिक विषयों में स्नातक स्तर पर 120 और पीजी में 60 सीटों पर ही नामांकन लिया जा रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कई विभागों में 130 से 140 सीटों तक एडमिशन होते रहे हैं। ऐसे में वहां भी सीटें कम होने का असर छात्रों पर साफ दिखाई दे रहा है।

    लाखों विद्यार्थियों के लिए बढ़ेगी चिंता

    रांची विश्वविद्यालय राज्य का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय माना जाता है। यहां झारखंड के विभिन्न जिलों से हर साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी दाखिला लेने पहुंचते हैं। इस बार जैक के आंकड़ों के अनुसार मैट्रिक परीक्षा में 4 लाख से अधिक विद्यार्थी सफल हुए हैं, जबकि इंटरमीडिएट की तीनों संकायों-कला, विज्ञान और वाणिज्य-को मिलाकर करीब 2.97 लाख छात्र-छात्राएं पास हुए हैं। अब इनमें से बड़ी संख्या में विद्यार्थी ग्रेजुएशन में नामांकन की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में सीटें कम होने से हजारों छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

    पहले संसाधन बढ़ाने की जरूरत : पूर्व प्राचार्य

    डोरंडा कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. वीएस तिवारी का कहना है कि बिना पर्याप्त तैयारी और संसाधन बढ़ाए सीटों में कटौती करना उचित नहीं होगा। उनके मुताबिक पहले कॉलेजों में शिक्षकों, भवनों और अन्य सुविधाओं को मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि रांची शहर के कॉलेजों में ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। इसलिए किसी भी फैसले से पहले छात्रों के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    क्लस्टर सिस्टम लागू होने के बाद ही साफ होगी तस्वीर

    रांची विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डॉ. सुदेश कुमार साहू का कहना है कि अभी विश्वविद्यालय को सीटों की अंतिम स्थिति की जानकारी नहीं है। क्लस्टर सिस्टम लागू होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि सीटों में कितनी कटौती होगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय फिलहाल सरकार के निर्देशों का इंतजार कर रहा है और जैसे ही अंतिम आदेश मिलेगा, उसी के अनुरूप नामांकन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। क्लस्टर सिस्टम का मकसद शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है, लेकिन इसका पहला असर सीटों की संख्या पर पड़ता दिख रहा है। ऐसे में इस साल रांची विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने वाले छात्रों को पहले के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। कम सीटें और ज्यादा आवेदक होने की स्थिति में कटऑफ भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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