Ranchi : झारखंड के कथित शराब घोटाले को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी मंगलवार को लोकभवन पहुंचे और राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। इस दौरान उन्होंने राज्यपाल को एक विस्तृत पत्र भी सौंपा।
750 करोड़ से ज्यादा के घोटाले का आरोप
मरांडी ने अपने पत्र में दावा किया है कि राज्य में 750 करोड़ रुपये से अधिक का शराब घोटाला हुआ है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आर्थिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक बड़ा संगठित भ्रष्टाचार है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
ACB पर लगाए गंभीर आरोप
मरांडी ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ACB इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच करने के बजाय भ्रष्टाचारियों को बचाने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि तय समयसीमा के भीतर आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया, जिससे आरोपियों को फायदा मिला।
गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन कार्रवाई ढीली पड़ी
पत्र में मरांडी ने बताया कि 20 मई 2025 को तत्कालीन उत्पाद सचिव IAS विनय कुमार चौबे और संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया था। इसके अगले दिन 21 मई को झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के GM (वित्त) सुधीर कुमार दास, पूर्व GM सुधीर कुमार और प्लेसमेंट एजेंसी से जुड़े नीरज कुमार को भी पकड़ा गया। इसके बाद अक्टूबर 2025 में महाराष्ट्र और गुजरात से 7 अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई। लेकिन मरांडी का आरोप है कि इसके बाद जांच की रफ्तार धीमी पड़ गई।
समय पर चार्जशीट नहीं, आरोपियों को मिली राहत
मरांडी ने कहा कि सबसे गंभीर बात यह रही कि ACB ने 90 दिनों की तय कानूनी समयसीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की।
इसी वजह से मुख्य आरोपी IAS विनय चौबे को 19 अगस्त 2025 को डिफॉल्ट बेल मिल गई। इसके एक दिन बाद 20 अगस्त को सुधीर कुमार दास, सुधीर कुमार और नीरज कुमार को भी जमानत मिल गई। वहीं गजेंद्र सिंह को भी 56 दिनों के भीतर जमानत मिल चुकी थी।
राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
मरांडी ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपें। साथ ही उन्होंने ACB को तुरंत चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश देने की भी मांग की है।
सियासी माहौल गरमाने के आसार
शराब घोटाले को लेकर BJP पहले से ही हमलावर रही है। मरांडी के इस कदम के बाद अब आने वाले दिनों में यह मुद्दा और जोर पकड़ सकता है। विपक्ष इसे बड़ा भ्रष्टाचार बता रहा है, वहीं सरकार की ओर से अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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