दिल्ली में प्रोटेस्ट कर रहे छात्रों के साथ प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शांति का नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी भी आगे आए हैं. अपने एक्स हैंडल पर उन्होंने लिखा, कल दिल्ली में हुई घटनाओं से मन दुखी भी है और गर्व से भरा भी. हमारे युवाओं और Gen-Z ने साबित कर दिया है कि वे दूसरे देशों के मुकाबले कितने अलग हैं.
वो लिखते हैं, लाठी और आंसू गैस के बीच संयम, आक्रोश के साथ अहिंसक बर्ताव और दुख में साहस तथा संकल्प – यह भारत के डीएनए की ताकत है. ये बच्चे किसी बहकावे में नहीं आए हैं, वे हमारे अपने बच्चे हैं और देश के भविष्य की बागडोर संभालने वाले हैं. पुरानी पीढ़ी तो सिर्फ कुछ सालों के लिए केयरटेकर भर है.
कैलाश सत्यार्थी के मुताबिक, हमें अब पारंपरिक राजनीति से ऊपर उठकर ‘करुणामय शासन’ (Compassionate Governance) की आवश्यकता है. करुणा दया या सहानुभूति नहीं, बल्कि दूसरों की पीड़ा को अपनी तकलीफ की तरह महसूस करके संवाद बनाना और निष्पक्ष समाधान निकालना है.
जब मैं दुनिया भर में करुणा के वैश्वीकरण (Globalisation of Compassion) के लिए कार्यरत हूं, तो अपने देश की सरकार और समाज से भी यही अपेक्षा करता हूं कि वे इन बच्चों के साथ तुरंत करुणामय संवाद और समाधान का मार्ग अपनाएं.
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