यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) यानी समान नागरिक संहिता को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारतीय जनता पार्टी को चुनौती दी है कि अगर पार्टी के पास पर्याप्त बहुमत है, तो वह संसद में UCC बिल लेकर आए और उसे पास कराकर दिखाए. उनका सवाल है कि जब केंद्र सरकार देशभर में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कर रही है, तो इसे अलग-अलग राज्यों के जरिए लागू करने के बजाय संसद से कानून क्यों नहीं बनाया जा रहा.
अमित शाह के बयान के बाद आया पलटवार
उमर अब्दुल्ला की यह टिप्पणी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान के बाद आई है. अमित शाह ने कहा है कि NDA की 21 राज्य सरकारें 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले अपने-अपने राज्यों में UCC लागू करेंगी.
बीजेपी लंबे समय से UCC को अपने प्रमुख राजनीतिक और वैचारिक मुद्दों में शामिल करती रही है. उत्तराखंड में UCC लागू हो चुका है, जबकि कुछ अन्य BJP शासित राज्यों में भी इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है.
उमर अब्दुल्ला का कहना है कि अगर बीजेपी वास्तव में पूरे देश में UCC लागू करना चाहती है, तो उसे संसद में कानून लाना चाहिए. उन्होंने BJP को चुनौती देते हुए कहा कि पार्टी के पास अगर बहुमत है तो वह संसद में UCC बिल लाकर उसे पास कराए.
उनके बयान को केंद्र की UCC नीति पर विपक्ष के सीधे राजनीतिक हमले के तौर पर देखा जा रहा है. उमर का तर्क यह भी है कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कानून बनाने के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर संसद के जरिए कानून बनाना ज्यादा स्पष्ट रास्ता होगा.
NDA के भीतर भी UCC पर मतभेद
समान नागरिक संहिता को लेकर बीजेपी के सामने सिर्फ विपक्ष की चुनौती नहीं है. NDA के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं. बिहार में BJP की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड यानी जदयू ने राज्य में UCC लागू करने को लेकर असहमति जताई है.
यह स्थिति BJP के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमित शाह ने 2029 से पहले 21 NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य रखा है. ऐसे में सहयोगी दलों की सहमति इस योजना के लिए अहम होगी.
समान नागरिक संहिता (UCC) क्या है?
समान नागरिक संहिता का मतलब देश के सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे निजी मामलों में एक समान कानून लागू करना है. फिलहाल भारत में इन मामलों को लेकर अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून मौजूद हैं.
संविधान में UCC का उल्लेख अनुच्छेद 44 में किया गया है. इसमें राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने की बात कही गई है.
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