गिरिडीह स्थित के मधुबन स्थित जुग जाहेरथान में संतालों का मरांग बुरु धोरोमगाढ़ सम्मेलन का आज आखिरी दिन है. इस सम्मेलन में देश विदेश से लोग पहुंचे. इसका आयोजन मरांग बुरू बचाव संघर्ष समिति की ओर से आयोजित किया गया है. गुरूवार को गांडेय विधायक कल्पना सोरेन मरांग बुरु धोरोमगाढ़ पहुंची.
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए आदिवासी समाज के चिंतकों के साथ मारांग बुरु धोरोमगाड़ महासम्मेलन में शामिल होने का सौभाग्य मिला. मारांग बुरु केवल एक पहाड़ नहीं, हमारी आस्था, परंपरा, पहचान और अस्तित्व का आधार हैं.
उन्होंने आगे कहा कि आज आदिवासी समाज से पूछा जा रहा है कि मारांग बुरु से उनका संबंध कितना पुराना है? कहाँ लिखा है? किस अभिलेख में इसका उल्लेख है?
लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी समाज की आस्था और सदियों पुरानी परंपरा का प्रमाण केवल कागज़ों में दर्ज कुछ पंक्तियाँ ही हो सकती हैं?
कल्पना सोरेन ने दोहराया मारांग बुरु हमारी आस्था भी हैं, हमारी पहचान भी.
क्या है मरांग बुरु धोरोमगाढ़
संथाली भाषा में ‘मरांग बुरु’ का अर्थ ‘महान पहाड़’ होता है, जो संथाल, मुंडा, और हो जैसी आदिवासी जनजातियों के सबसे बड़े देवता हैं. आदिवासियों का मानना है कि इस पहाड़ पर उनके भगवान निवास करते हैं, जो प्रकृति और सृष्टि के रचयिता हैं. मरांग बुरु आदिवासियों के लिए सर्वोच्च आस्था का केंद्र है खासकर के संताल लोगों के लिए. यह वर्तमान में गिरिडीह स्थित में स्थित है.


