Johar Live Desk : भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने मंगलवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। वे तिरुवनंतपुरम में नौसेना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। हालांकि उन्होंने ऑपरेशन से जुड़ी और कोई अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की, लेकिन उनके बयान से पाकिस्तान में बेचैनी बढ़ गई है। एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि मई महीने में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की आक्रामक तैयारी की वजह से पाकिस्तानी नौसेना को अपने ही बंदरगाहों के पास रुकना पड़ा। भारतीय नौसेना पूरी तरह तैयार थी और सिर्फ आदेश मिलने का इंतजार कर रही थी।
#WATCH | Delhi: Chief of Naval Staff, Admiral Dinesh K Tripathi says, “…We have inducted one submarine, commissioned by the Prime Minister on January 15th during the Tri-ship commissioning event, and 12 warships since the last Navy Day. INS Udaygiri, commissioned by the RM in… pic.twitter.com/Xkj0dhDnOt
— ANI (@ANI) December 2, 2025
उन्होंने कहा कि पिछले सात से आठ महीनों में पाकिस्तान के साथ बढ़े तनाव के चलते भारतीय नौसेना ने पश्चिमी अरब सागर समेत कई क्षेत्रों में अपने युद्धपोतों और पनडुब्बियों की तैनाती को ऊँचे स्तर पर बनाए रखा। ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि विमानवाहक पोत और अन्य युद्धपोतों की आक्रामक तैनाती ने पाकिस्तान को कराची पोर्ट और मकरान तट के पास ही सीमित रहने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ऑपरेशन से पाकिस्तान को बड़ा आर्थिक नुकसान भी हुआ है, क्योंकि संघर्ष के बाद कई व्यापारी जहाज पाकिस्तान जाने से बच रहे हैं।
एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि इस साल दिवाली पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आईएनएस विक्रांत पर रात बिताई और नौसेना की तैयारियों का खुद निरीक्षण किया। नौसेना प्रमुख ने आगे बताया कि पिछले नौसेना दिवस के बाद से नौसेना में 12 नए युद्धपोत शामिल किए गए हैं। इनमें अगस्त में लॉन्च हुआ आईएनएस उदयगिरि और 24 नवंबर को लॉन्च हुआ आईएनएस माहे भी मौजूद है। आईएनएस माहे पहला ऐसा युद्धपोत है जिसे पूरी तरह निजी भारतीय डिजाइनर ने डिजाइन और बनाया है।
उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न शिपयार्ड में इस समय 51 प्लेटफॉर्म तैयार हो रहे हैं। 24 दिसंबर तक 1,27,554 करोड़ रुपये के 94 पूंजीगत मामलों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें 47 जहाज और 120 तेज इंटरसेप्टर बोट शामिल हैं। 84,762 करोड़ रुपये के 83 अनुबंधों पर हस्ताक्षर भी हो चुके हैं, जिनमें कई आपातकालीन खरीद भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि 26 राफेल मरीन विमानों के अनुबंध पर 25 अप्रैल को हस्ताक्षर किए गए थे और पहले चार विमान 2029 तक मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा राष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र जागरूकता (NMDA) परियोजना के लिए भी अनुबंध किया गया है। साथ ही बेस डिपो जहाज अरावली को भी सेवा में शामिल किया गया है। ये परियोजनाएं सात मंत्रालयों और 15 राष्ट्रीय एजेंसियों के डेटा को एक साथ लाकर समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करेंगी।
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