मुस्कान चौधरी
आज जब आप कपड़े खरीदने जाते हैं, तो जूडियो नाम आपके जेहन में जरूर रहता होगा. कपड़ों के ऑनसलाइन बाजार के आगे ऑफलाइन बाजार का यह ब्रांड ना खुद को स्थापित किया, बल्कि अपने समकक्ष कई ब्रांड को टक्कटर भी देने लगा. ऑनलाइन के जमाने में ऑफलाइन बाजार में उतर कर, दोनों को टक्कर देनेवाले इस आर्किटेक्ट ने अपने इस प्यारे ब्रांड को अलविदा कर दिया है. ऐसा करनेवाले कोई और नहीं, वो हैं नोएल टाटा. भारतीय उद्योग जगत का वो नाम, जिसे शायद ही कोई नहीं जानता हो.
टाटा समूह के वरिष्ठ उद्योगपति और ट्रेंट लिमिटेड के प्रमुख रणनीतिकार नोएल टाटा ने ज़ूडियो, वेस्टसाइड को सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि देश के करोड़ों ग्राहकों की पसंद बना दिया. उनकी दूरदर्शी सोच और रणनीति की बदौलत ज़ूडियो ने किफायती दामों पर ट्रेंडी फैशन उपलब्ध कराकर छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक अपनी मजबूत पहचान बनाई. आज ज़ूडियो, वेस्टसाइड की तेज़ सफलता और देशभर में हुए विस्तार के पीछे सबसे अहम नाम नोएल टाटा का ही माना जाता है.
आखिर कौन हैं नोएल टाटा?

नोएल टाटा का जन्म 1957 में नवल टाटा और सिमोन टाटा के घर हुआ. वह रतन टाटा के सौतेले भाई थे. उन्होंने ब्रिटेन के ससेक्स विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फ्रांस के आईएनएसईएडी बिजनेस स्कूल से प्रबंधन की शिक्षा हासिल की. नोएल टाटा ने अपने करियर की शुरुआत टाटा इंटरनेशनल से की. 1999 में वह ट्रेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर बने और ज़ूडियो, वेस्टसाइड ब्रांड को सफल रिटेल चेन के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई.
रिटायरमेंट के बाद वे एक ऐसी कंपनी पीछे छोड़ेंगे जो एक सिंगल-स्टोर एक्सपेरिमेंट से बढ़कर भारत के सबसे कीमती रिटेलर्स में से एक बन गई है. ट्रेंट की सफलता के पीछे नोएल टाटा की स्पष्ट रणनीति रही. उस दौर में जब अधिकांश रिटेल कंपनियां अपने स्टोर में कई बाहरी ब्रांड बेच रही थीं, उन्होंने वेस्टसाइड को पूरी तरह प्राइवेट लेबल ब्रांड के रूप में विकसित करने का फैसला किया.
इस मॉडल से कंपनी को कीमत तय करने, उत्पादों की प्रस्तुति और मुनाफे पर बेहतर नियंत्रण मिला. साथ ही ग्राहकों की बदलती पसंद के अनुसार तेजी से नए उत्पाद बाजार में उतारने में भी मदद मिली.
साल 2016 में नोएल टाटा ने एक और बड़ा दांव खेला और जूडियो की शुरुआत की. कम कीमत में फैशनेबल कपड़े उपलब्ध कराने वाले इस ब्रांड ने देखते ही देखते बाजार में अपनी मजबूत जगह बना ली. खासकर छोटे शहरों और मध्यम वर्ग के ग्राहकों ने इसे हाथोंहाथ लिया. दिलचस्प बात यह रही कि जब कई बड़ी रिटेल कंपनियां ऑनलाइन कारोबार बढ़ाने में जुटी थीं, तब भी जूडियो ने ऑफलाइन स्टोर मॉडल को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाए रखा.
नोएल टाटा के नेतृत्व में ट्रेंट ने जबरदस्त कारोबार बढ़ाया. कंपनी कि मदनी करीब 1,300 करोड़ रुपये से बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि मुनाफ़ा 130 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 1,700 करोड़ रुपये हो गया. इसी दौरान वेस्टसाइड के स्टोर 300 से ज्यादा और जूडियो के करीब 960 आउटलेट हो गए. कंपनी का मार्केट कैप भी बढ़कर लगभग 1.73 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया.
नोएल टाटा के इस फैसले के साथ टाटा ग्रुप में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया और तेज होती दिख रही है. ट्रेंट में जूडियो और वेस्टसाइड जैसे सफल ब्रांड खड़े करने के बाद अब वह वोल्टास की कमान भी नई टीम को सौंपने जा रहे हैं. ऐसे में आने वाले समय में समूह की प्रमुख कंपनियों में नए नेतृत्व की भूमिका पर सबकी नजर रहेगी.

नोएल टाटा के बारे में कुछ दिलचस्प बातें
- आयरिश नागरिकता : भारत के सबसे मशहूर बिज़नेस ग्रुप्स में से एक में अहम भूमिका निभाने के बावजूद, नोएल टाटा के पास आयरिश नागरिकता है, क्योंकि उनका जन्म मुंबई में एक स्विस बिज़नेसवुमन (सिमोन टाटा) के घर हुआ था.
- आयरलैंड के सबसे अमीर परिवार में शादी : उन्होंने आलू मिस्त्री से शादी की है, जो स्वर्गीय शापूर मिस्त्री और टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की बहन हैं. प्रतिष्ठित शिक्षा: उन्होंने UK की ससेक्स यूनिवर्सिटी से बैचलर डिग्री हासिल की और इसके बाद फ्रांस के INSEAD बिज़नेस स्कूल से कठिन ‘इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम’ पूरा किया.
- कई भाषाएं का ज्ञान : अपने बड़े इंटरनेशनल बिज़नेस ऑपरेशन्स और रिटेल विस्तार की वजह से, वे फ्रेंच भाषा में माहिर हो गए और हिंदी व अंग्रेज़ी में भी अच्छी तरह बातचीत कर सकते हैं.
वेस्टसाइड के रहते क्यों लॉंच हुआ जूडियो?
इसे समझने के लिए वेस्टसाइड के शुरुआती दौर पर नजर डालते हैं. 1998 में शुरू हुए वेस्टसाइड का फोकस प्रीमियम शॉपिंग एक्सपीरियंस था. इसलिए उसने शुरुआत में टियर-1 शहरों के पॉश इलाकों में अपने स्टोर खोले. लेकिन जैसे-जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में लोगों की आय और फैशन के प्रति जागरूकता बढ़ी, कंपनी ने वहां भी विस्तार किया.
हालांकि, वेस्टसाइड की अपेक्षाकृत ऊंची कीमतों के कारण इन बाजारों में उसे उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली. इसी गैप को पहचानते हुए ट्रेंट ने ज़ूडियो लॉन्च किया, जिसने कम कीमत में ट्रेंडी और अच्छी क्वालिटी के कपड़े उपलब्ध कराकर तेजी से ग्राहकों के बीच अपनी जगह बना ली. 2021 में जहां इसके सिर्फ 80 स्टोर थे, वहीं FY26 के अंत तक यह संख्या 963 हो गई. अब ज़ूडियो भारत के 313 शहरों तक पहुंच चुका है.
बहरहाल, नोएल टाटा इस साल नवंबर में 70 साल की उम्र पूरी होने के बाद वोल्टास के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे देंगे. उन्होंने मंगलवार को कंपनी की 72वीं सालाना जनरल मीटिंग (AGM) में शेयरहोल्डर्स को खुद इसकी जानकारी दी. शेयरहोल्डर्स को संबोधित करते हुए वोल्टास के चेयरमैन नोएल टाटा ने कहा कि जैसा कि आप सभी को शायद पता ही होगा, चेयरमैन के रूप में यह मेरी आखिरी सालाना जनरल मीटिंग है. नोएल टाटा का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही उन्होंने ट्रेंट के चेयरमैन पद से भी हटने की घोषणा की थी. लगातार दो बड़ी कंपनियों में उनके पद छोड़ने के फैसले को टाटा ग्रुप में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है.
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