जोहार लाइव ब्यूरो
रांची : झारखंड में बिजली क्षेत्र से जुड़े करीब 97 करोड़ रुपये के कथित गबन और फर्जी बैंक खाते के मामले में रांची की अदालत ने बड़ा आदेश दिया है. अपर न्यायिक आयुक्त-XVIII कुलदीप की अदालत ने झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड (JUUNL) को बरामद और होल्ड की गई राशि में से 13.53 करोड़ रुपये अंतरिम रूप से वापस करने का आदेश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राशि मामले के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी और जरूरत पड़ने पर JUUNL को इसे ब्याज समेत वापस करना होगा.
मामला CID Ranchi P.S. Case No. 44/2024 से जुड़ा है. अदालत का यह आदेश 14 अगस्त 2026 को जारी हुआ जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बिरसा चौक शाखा में एक फर्जी बैंक खाता खोलकर सरकारी और कर्मचारियों के फंड से करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए. जांच रिपोर्ट के मुताबिक इस खाते के जरिए JUUNL और झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लाइज मास्टर ट्रस्ट (JSEEMT) की कुल 97 करोड़ रुपये की राशि के गबन का मामला सामने आया है.
फर्जी खाते में ट्रांसफर हुए 40.50 करोड़
CID की जांच रिपोर्ट के अनुसार सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बिरसा चौक शाखा में 5600134210 नंबर का एक फर्जी खाता खोला गया था. आरोप है कि इसी खाते के माध्यम से JSEEMT के इंडियन बैंक, धुर्वा स्थित खाते से 40.50 करोड़ रुपये अवैध तरीके से ट्रांसफर और गबन किए गए. यह लेनदेन 18 जून 2024 से 7 अगस्त 2024 के बीच हुआ था.
इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक, अरगोड़ा शाखा से भी 16 करोड़ रुपये के अवैध ट्रांसफर और गबन की बात जांच रिपोर्ट में सामने आई है. इन दोनों मामलों में कुल राशि 56.50 करोड़ रुपये बताई गई है. इस संबंध में CID थाना कांड संख्या 43/2024 दर्ज किया गया है.
जांच रिपोर्ट के मुताबिक JUUNL, धुर्वा के बैंक ऑफ इंडिया, क्लब साइड रोड शाखा स्थित खाते से भी उसी फर्जी खाते में रकम भेजी गई. 8 अगस्त 2024 को 25 करोड़ 500 रुपये और 9 अगस्त 2024 को 15.50 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। इस तरह JUUNL से कुल 40 करोड़ 50 लाख 500 रुपये फर्जी खाते में पहुंचे.

CID का आरोप है कि इस रकम को बाद में अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया और कथित तौर पर उसका गबन किया गया. जांच में यह भी सामने आया कि इसी रकम का इस्तेमाल JUUNL के नाम पर छह फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD बनाने में किया गया. दस्तावेज के अनुसार इस मामले में तत्कालीन सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बिरसा चौक शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक लोहास लकड़ा को प्राथमिक आरोपी बताया गया है.
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब 40.50 करोड़ रुपये के टर्म डिपॉजिट से जुड़े छह प्रमाणपत्र जारी किए गए. बाद में झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लाइज मास्टर ट्रस्ट को पता चला कि ये प्रमाणपत्र फर्जी हैं. 3 अक्टूबर 2024 को इसकी जानकारी सामने आने के बाद संबंधित बैंक से संपर्क किया गया. अगले दिन, 4 अक्टूबर 2024 को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बिरसा चौक शाखा ने ई-मेल के माध्यम से पुष्टि की कि संबंधित TDR उस शाखा ने जारी नहीं किया था.
इसके बाद पहले धुर्वा थाना में कांड संख्या 291/2024 दर्ज किया गया। बाद में मामले को अपराध अनुसंधान विभाग यानी CID को ट्रांसफर कर दिया गया और CID P.S. Case No. 44/2024 दर्ज हुआ.
32.40 करोड़ रुपये अब तक होल्ड या बरामद
जांच के दौरान फर्जी खाते से जुड़े लेनदेन पर कार्रवाई करते हुए बड़ी रकम को होल्ड किया गया। CID की रिपोर्ट के अनुसार फर्जी खाते से अब तक 29,70,99,718 रुपये होल्ड किए गए. इसके अलावा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की टॉलीगंज शाखा ने 2,69,75,804 रुपये होल्ड किए थे, जिसे बाद में बिरसा चौक शाखा के पार्किंग खाते में वापस रखा गया. इस तरह कुल 32,40,75,522 रुपये होल्ड या रिकवर किए गए.

जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि फर्जी खाते से अलग-अलग स्तरों यानी लेयर-1 से लेयर-12 तक कई खातों में करीब 5 करोड़ रुपये और ट्रांसफर किए गए, जिन्हें भी होल्ड या फ्रीज किया गया है. इन लेनदेन की जांच अभी जारी है.
अदालत ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि बरामद 32.40 करोड़ रुपये JSEEMT और JUUNL दोनों से जुड़े धन का मिश्रित पूल है. दोनों मामलों में कथित तौर पर गबन की कुल रकम 97 करोड़ रुपये है। इसलिए पूरी बरामद रकम सिर्फ JUUNL को देने से JSEEMT के दावे पर असर पड़ सकता था.
अदालत ने इसी आधार पर JUUNL के हिस्से को कुल कथित गबन राशि में उसके अनुपात के हिसाब से करीब 41.75 प्रतिशत माना. अदालत ने कहा कि यदि जांच अधिकारी किसी खास रकम की सटीक पहचान किसी एक संस्था के फंड के रूप में प्रमाणित नहीं करता है, तो साझा बरामद रकम में इसी अनुपात को आधार बनाया जाएगा.
JUUNL को 13.53 करोड़ की अंतरिम राहत
अदालत ने BNSS की धारा 497 के तहत JUUNL की अंतरिम रिलीज की मांग को आंशिक रूप से स्वीकार किया. आदेश के अनुसार 32.40 करोड़ रुपये की कुल होल्ड राशि में से JUUNL के हिस्से के रूप में 13.53 करोड़ रुपये उसके सत्यापित और आधिकारिक परिचालन खाते में जारी किए जाएंगे.
हालांकि अदालत ने इसके साथ कड़ी शर्तें भी लगाई हैं। JUUNL को 15 करोड़ रुपये का इंडेम्निटी बॉन्ड और दो सक्षम कॉरपोरेट अथॉराइज्ड जमानतदार देने होंगे. जारी की गई राशि मामले के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगी. यदि अदालत या उच्च अदालत बाद में रकम वापस जमा करने या लौटाने का आदेश देती है, तो JUUNL को संबंधित राशि बैंक ब्याज समेत वापस करनी होगी.
राशि जारी करने से पहले अदालत ने जांच अधिकारी और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बिरसा चौक शाखा के शाखा प्रबंधक को JUUNL के अधिकृत प्रतिनिधि की बोर्ड रेजोल्यूशन और प्राधिकरण की जांच करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही विस्तृत पंचनामा और सीजर रिलीज मेमो तैयार करने तथा लेनदेन से जुड़े फोटो और दस्तावेजी प्रमाण केस डायरी और कोर्ट रिकॉर्ड में रखने को कहा गया है.
अदालत ने आदेश की प्रति CID झारखंड के जांच अधिकारी और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बिरसा चौक शाखा के शाखा प्रबंधक को तत्काल अनुपालन के लिए भेजने का निर्देश दिया है.
पूरे मामले में अब तक सामने आई रकम
• 97 करोड़ रुपये दोनों मामलों में कथित कुल गबन की राशि.
• 56.50 करोड़ रुपये JSEEMT से कथित तौर पर अवैध रूप से ट्रांसफर की गई राशि.
• 40.50 करोड़ रुपये JUUNL से कथित तौर पर फर्जी खाते में ट्रांसफर.
• 32.40 करोड़ रुपये अब तक होल्ड या रिकवर की गई राशि.
• 13.53 करोड़ रुपये JUUNL को अदालत ने अंतरिम रूप से जारी करने का आदेश दिया.
• करीब 5 करोड़ रुपये अलग-अलग लेयर के खातों में ट्रांसफर किए गए, जिन्हें जांच के दौरान फ्रीज किया गया है.
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