साल 1990… कश्मीर आतंकवाद की आग में झुलस रहा था. घाटी में डर, धमकियों और टारगेट किलिंग का दौर था. इसी दौर में एक 27 साल की कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट की ऐसी रूह कंपाने वाली हत्या हुई, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया. तीन दशक से ज्यादा समय तक यह मामला लगभग ठंडे बस्ते में रहा. लेकिन अब 36 साल बाद जम्मू-कश्मीर की SIA यानी स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने इस मामले में 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है और इसमें प्रतिबंधित संगठन JKLF के तत्कालीन प्रमुख यासीन मलिक को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है.
कौन थी सरला भट्ट?
सरला भट्ट अनंतनाग के एक साधारण कश्मीरी पंडित परिवार से थी. उनके पिता स्कूल टीचर थे. वह घर की सबसे बड़ी बेटी थी, इस चलते शादी से पहले अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया. उन्होंने नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की और श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में स्टाफ नर्स के रूप में नौकरी शुरू की. परिवार को उन पर गर्व था और अस्पताल में भी उन्हें मेहनती व संवेदनशील नर्स माना जाता था.
जब आतंकियों ने बना लिया निशाना
अप्रैल 1990 में घाटी में आतंकवाद अपने चरम पर था. कश्मीरी पंडितों को लगातार धमकियां मिल रही थीं और बड़ी संख्या में लोग घाटी छोड़ रहे थे. इसी बीच 15 अप्रैल 1990 को हथियारबंद आतंकवादी SKIMS के हॉस्टल पहुंचे और सरला भट्ट को जबरन अपने साथ उठा ले गए. परिवार और सहकर्मियों को कई दिनों तक उनकी कोई जानकारी नहीं मिली. करीब चार दिन बाद श्रीनगर के सौरा इलाके में सड़क किनारे सरला भट्ट का शव मिला. मीडिया में आई विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार पहले उनका अपहरण किया गया। इसके बाद बेइंतहा यातना दी गई और फिर मौत के घाट उतर दिया गया. लाश के पास एक पर्ची भी छोड़ी गई थी, जिसमें उन्हें पुलिस का मुखबिर बताया गया था. बाद की जांच में पुलिस ने इस दावे को खारिज किया और इसे उस दौर में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हुई लक्षित हिंसा के पैटर्न का हिस्सा बताया. जब सरला का शव परिवार को सौंपा गया, तब भी खौफ का माहौल खत्म नहीं हुआ था. घर के बाहर धमकियां दी गईं. अंतिम संस्कार तक में मुश्किलें आईं. आसपास के कई लोग डर के कारण खुलकर साथ नहीं आ सके. इस घटना के बाद उनके इलाके के बचे हुए कश्मीरी पंडित परिवारों ने भी घाटी छोड़ने का फैसला कर लिया. सरला भट्ट की हत्या कश्मीरी पंडितों के बड़े पैमाने पर हुए पलायन की सबसे चर्चित घटनाओं में गिनी जाने लगी.
36 साल बाद फिर खुली फाइल
करीब साढ़े तीन दशक तक यह मामला न्याय का इंतजार करता रहा. 2025 में SIA ने दोबारा जांच शुरू की. कई जगह छापेमारी हुई, पुराने दस्तावेज जुटाए गए और गवाहों के बयान दर्ज किए गए. अब 29 जून 2026 को एजेंसी ने विशेष अदालत में 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल करते हुए यासीन मलिक समेत अन्य आरोपियों को इस हत्या की साजिश और वारदात को अंजाम तक पहुंचाने का दावा किया है. अदालत में अब इस मामले की आगे सुनवाई होगी और आरोपों की न्यायिक जांच होगी.

