रांची: झारखंड के जंगल, पहाड़, आदिवासी जीवन और उनकी अनकही दास्तानें लंबे समय से सिनेमा का हिस्सा बनती रही हैं, लेकिन अब इस माटी की अपनी आवाज को युवा फिल्मकार खुद पर्दे पर उतार रहे हैं. इसी कड़ी में रांची के बुंडू के रहने वाले युवा फिल्मकार सौरभ कुमार मुंडा की मुंडारी फिल्म ‘ए रिवर कलर्ड रेड’ (मियद आरा: गाड़ा) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इस फिल्म का चयन मुंबा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के सातवें संस्करण की स्टूडेंट कैटेगरी में हुआ है.
यह प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवल 6 से 10 अक्टूबर तक पुणे में आयोजित किया जा रहा है, जिसे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, एनएफडीसी (NFDC) और एनएफएआई (NFAI) का आधिकारिक सहयोग प्राप्त है.
आदिवासी अस्तित्व और संघर्ष की कहानी
ए रिवर कलर्ड रेड (मियद आरा: गाड़ा) फिल्म पूरी तरह से मुंडारी भाषा में बनाई गई है, और इसके सभी कलाकार झारखंड से ही ताल्लुक रखते हैं. फिल्म की कहानी एक ऐसे आदिवासी परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो खनन (माइनिंग) और बाहरी हस्तक्षेप के गंभीर प्रभावों से जूझ रहा है. परिवार के सामने अपने अस्तित्व को बचाने की कठिन चुनौती है, जिसमें माता-पिता दोनों अपने-अपने स्तर पर संघर्ष करते नजर आते हैं.
निर्देशक सौरभ कुमार मुंडा के अनुसार, यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में गहरी आदिवासियत और मुंडा समुदाय की उत्पत्ति कथा जुड़ी हुई है, जो जमीन और समुदाय के वजूद से जुड़े कई अहम सवाल उठाती है.
झारखंड की माटी से लेकर FTII के युवा कलाकारों का संगम
ए रिवर कलर्ड रेड (मियद आरा: गाड़ा) फिल्म में अभिनय के मोर्चे पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) से जुड़ीं सुमन पूर्ति और थिएटर पृष्ठभूमि से आने वाले अनुराग लुगून ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं. इसके अलावा बाल कलाकार आयुष लुगुन और गायक किसुन पूर्ति इस फिल्म के जरिए पहली बार अभिनय की दुनिया में कदम रख रहे हैं.
फिल्म की तकनीकी टीम में छायांकन की जिम्मेदारी वेसाबो योबिन, संपादन सत्यम महतो, प्रोडक्शन डिजाइन अर्पित नाग और साउंड डिजाइन मयूरेश राजगुरे ने संभाला है. खास बात यह है कि ये सभी तकनीकविद् फिल्म के निर्देशक सौरभ कुमार मुंडा के साथ पुणे स्थित प्रसिद्ध फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) में एक ही बैच के छात्र रहे हैं.

बुंडू से पुणे तक का सफर
सौरभ कुमार मुंडा ने अपनी स्कूली शिक्षा नेतरहाट विद्यालय से पूरी करने के बाद सौरभ मुंडा ने बीआईटी से स्नातक और रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (PG) की डिग्री हासिल की. इसके बाद फिल्मों के प्रति अपने जुनून को पूरा करने के लिए उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान FTII, पुणे से फिल्म डायरेक्शन और स्क्रिनप्ले राइटिंग की विधिवत शिक्षा ली.
मुंबा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म का चयन होना, झारखंड की स्थानीय भाषाओं, लोक-संस्कृति और आदिवासी जीवन को अपनी अनूठी दृष्टि से राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने वाली नई पीढ़ी के फिल्मकारों के बढ़ते कदम और उनकी सशक्त उपस्थिति का प्रमाण है.
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