जोहार लाइव ब्यूरो
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विकासशील इंसान पार्टी (VIP) प्रमुख मुकेश सहनी के एक बयान पर विवाद खड़ा हो गया है. 24 सितंबर को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सहनी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए और ज्ञानेश कुमार को लेकर हिंसात्मक टिप्पणी की.
दरअसल, विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) अभियान को तुरंत रद करने की मांग की है. इसके साथ ही, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए विपक्ष ने आरोप लगाया कि वह चुनाव आयोग को अपनी मनमर्जी से एक ‘तानाशाह’ की तरह चला रहे हैं.
एक खून माफ होता तो मैं ज्ञानेश कुमार को गोली मार देता,- मुकेश सहनी #EC pic.twitter.com/siOOl7PHtV
— Mukesh singh (@Mukesh_Journo) September 24, 2026
मुकेश सहनी ने कहा कि-
“निश्चित तौर पर हमने कहा कि अगर हमको एक खून अगर माफ़ हो, देश के संविधान अगर हमको इस चीज़ का इजाज़त दे, तो ज्ञानेश कुमार को हम गोली मार देंगे. क्योंकि आज के तारीख में ये देश को खत्म करने में लगे हुए हैं… अगर हमारे ऊपर संविधान नहीं होता, तो हम स्वयं गोली मार देते…”
सहनी यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में ये छूटेंगे नहीं. 2029 में राहुल गांधी जी के नेतृत्व में देश में सरकार बनेगी और पहले आदमी यही होंगे जो जेल जाएंगे. उन्होंने कहा कि इनके साथ में जितने भी लोग इसमें शामिल हैं, वो भी जेल जाएंगे. कोई बचने वाला नहीं है.
चुनाव आयोग पर लगाए कई आरोप
मुकेश सहनी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पश्चिम बंगाल में वोट काटे जाने और बिहार चुनाव के दौरान मतदाताओं के खातों में पैसे भेजे जाने के आरोप भी लगाए. उन्होंने तीन चुनाव आयुक्तों की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया और कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर जनता को इन मुद्दों को समझने की जरूरत है.

सहनी का यह बयान उन रिपोर्टों के बीच आया है, जिनमें दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मतदाता सूची और SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई. , इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाताओं के नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटा के रखरखाव से जुड़े मुद्दे शामिल थे.
इन रिपोर्टों के बाद चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR समेत उसके सभी आधिकारिक फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं. आयोग के मुताबिक, विचार-विमर्श के दौरान दी गई व्यक्तिगत राय, टिप्पणियां या तकनीकी सुझाव अलग आधिकारिक फैसले नहीं माने जाते.
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