कलकत्ता हाईकोर्ट ने नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव को लेकर एक अहम फैसले में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को चुनाव लड़ने की पूरी अनुमति दी जानी चाहिए. अदालत ने केजुरी थाने के 2007 के एक पुराने मामले में मिलन प्रधान की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ 12 अक्टूबर तक किसी भी तरह की कड़क कार्रवाई पर रोक लगा दी है.
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पिछली सुनवाई (22 सितंबर) के दौरान इस नए (केजुरी थाने के) मामले का जिक्र क्यों नहीं किया गया था.
अदालत ने आदेश दिया कि 2007 के इस पुराने मामले में 12 अक्टूबर तक मिलन प्रधान के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी और न ही उन्हें इस मामले में गिरफ्तार दिखाया जाएगा. ज्ञात हो कि नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है, जबकि चुनाव प्रचार 4 अक्टूबर को समाप्त हो जाएगा और 9 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी.
क्या है पूरा मामला?
मिलन प्रधान को 18 सितंबर को 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद पिछले दिनों निचली अदालतों द्वारा उन्हें कुछ अन्य पुराने मामलों में भी न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.
मिलन प्रधान के वकीलों ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि चुनाव से ठीक पहले, लगभग दो दशक पुराने मामलों का हवाला देकर की जा रही यह कार्रवाई चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसी है. वहीं, राज्य सरकार का पक्ष रख रहे वकीलों ने इसे चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत पुराने लंबित वारंटों की सामान्य प्रक्रिया बताया.
हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद कांग्रेस उम्मीदवार और उनके समर्थकों को बड़ी राहत मिली है, जिससे उनके चुनाव मैदान में बने रहने का रास्ता साफ हो गया है.

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