New Delhi : पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी विवाद बढ़ता जा रहा है। बुधवार को सीएम ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में इस प्रक्रिया के खिलाफ पेश हुईं।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए ममता बनर्जी को अपनी बहस के लिए वकील को मौका देने और जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का समय दिया। अगली सुनवाई सोमवार को होगी। सुनवाई से पहले ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के घर से सुप्रीम कोर्ट के लिए रवाना हुईं। ममता ने कोर्ट में कहा कि पश्चिम बंगाल को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है, जबकि अन्य राज्यों जैसे असम में ऐसी प्रक्रिया नहीं चल रही। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले फेज में 58 लाख और दूसरे फेज में 1.30 करोड़ वोटरों के नाम हटाए गए। उनका कहना था कि लॉजिकल अंतर को हटाने का निर्णय DO या ERO द्वारा होना चाहिए, न कि माइक्रो-ऑब्जर्वर द्वारा।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ममता ने यह भी कहा कि कई बीएलओ और नागरिक इस प्रक्रिया में परेशान हुए हैं और इसमें मरने वाले भी हुए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर ‘व्हाट्सऐप आयोग’ होने का तंज भी किया। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम. पंचोली शामिल हैं, ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने बंगाली उच्चारण के मुद्दे पर टिप्पणी की, जिस पर ममता बनर्जी ने बीच में टिप्पणी की।
सीएम ने कोर्ट में नई अर्जी भी दी, जिसमें उन्होंने अपील की कि SIR प्रक्रिया के दौरान किसी भी वोटर का नाम हटाया न जाए और राज्य में वोटर वेरिफिकेशन के लिए विभिन्न दस्तावेज़ों को स्वीकार करने का निर्देश दिया जाए। इनमें आधार, परमानेंट रेजिडेंस सर्टिफिकेट, पंचायत रेजिडेंस सर्टिफिकेट, फैमिली रजिस्टर, सोशियो-इकोनॉमिक जाति जनगणना डेटा और जमीन/घर अलॉटमेंट सर्टिफिकेट शामिल हैं।
इस बीच, शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने ममता बनर्जी के कदमों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया एकतरफा तरीके से हो रही है और अगर भाजपा की मनमानी जारी रही, तो वे कानूनी लड़ाई लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे। इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया और वोटर लिस्ट को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद और गहरा गया है।
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