मुस्कान चौधरी
भारत में लंबे समय तक राष्ट्रपति पद पर सिर्फ पुरुष ही पहुंचे. फिर साल 2007 में एक ऐसा नाम सामने आया, जिसने यह परंपरा बदल दी. हैरानी की बात यह थी कि जब राष्ट्रपति पद के लिए देश के कई बड़े और चर्चित नेताओं के नाम चल रहे थे, तब अचानक एक महिला नेता पर सबकी सहमति बन गई. यह नाम था प्रतिभा देवी सिंह पाटिल का.
महाराष्ट्र के जलगांव से निकलकर राजनीति की सीढ़ियां चढ़ने वाली प्रतिभा पाटिल ने कभी खुद को सुर्खियों में रखने की राजनीति नहीं की. समाज सेवा, सादगी और लंबे राजनीतिक अनुभव के दम पर उन्होंने वह मुकाम हासिल किया, जो उनसे पहले किसी भारतीय महिला ने नहीं पाया था. आखिर किन परिस्थितियों में उनका नाम राष्ट्रपति पद के लिए चुना गया, उन्होंने दिग्गज नेता भैरोसिंह शेखावत को कैसे हराया और कैसे बनीं भारत की पहली महिला राष्ट्रपति. आइए जानते हैं उनकी पूरी कहानी.
प्रतिभा पाटिल का जीवन परिचय
प्रतिभा पाटिल का जन्म 19 दिसंबर 1934 को महाराष्ट्र के जलगांव जिले में हुआ था. उनके पिता का नाम नारायण राव पाटिल था, जो स्वयं भी राजनीति से जुड़े हुए थे. प्रतिभा पाटिल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा जलगांव में पूरी की. इसके बाद उन्होंने मूलजी जैठा कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में दाखिला लिया और कानून की पढ़ाई पूरी की.
कॉलेज के दिनों से ही प्रतिभा पाटिल पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय रहती थीं. वह एक बेहतरीन टेबल टेनिस खिलाड़ी थीं और कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी थीं. अपनी प्रतिभा और व्यक्तित्व के कारण उन्हें ‘कॉलेज क्वीन’ का खिताब भी मिला था.
साल 1965 में प्रतिभा पाटिल का विवाह प्रोफेसर देवीसिंह रणसिंह शेखावत से हुआ. उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं. सादगीपूर्ण जीवनशैली, साड़ी और बड़ी बिंदी उनकी पहचान बन गई, जिसने उन्हें एक अलग सार्वजनिक छवि दी.
राजनीति की शुरुआत
प्रतिभा पाटिल ने राजनीति में आने से पहले समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई. वह विशेष रूप से महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक उत्थान के लिए काम करती थीं. 27 वर्ष की उम्र में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर महाराष्ट्र के जलगांव विधानसभा क्षेत्र से पहला चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसके बाद मुक्ताईनगर से लगातार चार बार विधायक चुनी गईं.
अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं. वर्ष 1967 से 1972 तक महाराष्ट्र सरकार में उपमंत्री रहीं, जबकि 1972 से 1974 तक समाज कल्याण मंत्री का पद संभाला. 18 नवंबर 1986 से 5 नवंबर 1988 तक वह राज्यसभा की उपसभापति रहीं. इसके बाद 8 नवंबर 2004 से 23 जून 2007 तक राजस्थान की राज्यपाल के रूप में कार्य किया.
राष्ट्रपति पद के लिए कई नामों पर हुआ मंथन
साल 2007 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) और वाम दलों के बीच उम्मीदवार को लेकर लंबी चर्चा हुई. शुरुआत में कई वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आए. वाम दलों ने प्रणब मुखर्जी का नाम आगे बढ़ाया, जबकि कांग्रेस की ओर से शिवराज पाटिल और डॉ. कर्ण सिंह के नाम प्रस्तावित किए गए. हालांकि, इन नामों पर सहमति नहीं बन सकी. इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह और मोतीलाल वोहरा के नामों पर भी विचार हुआ, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उन पर भी फैसला नहीं हो पाया.
बैठक में कैसे सामने आया प्रतिभा पाटिल का नाम
उम्मीदवार तय करने के लिए दिल्ली में सोनिया गांधी के आवास पर कांग्रेस और वाम दलों की अहम बैठक हुई. बैठक में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी, डी. राजा, ए.बी. वर्धन, प्रकाश करात और सीताराम येचुरी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे. चर्चा के दौरान डी. राजा ने सुझाव दिया कि इस बार देश को पहली महिला राष्ट्रपति दी जानी चाहिए. इसके बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राजस्थान की तत्कालीन राज्यपाल और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रतिभा देवी सिंह पाटिल का नाम प्रस्तावित किया. इस प्रस्ताव पर सभी सहयोगी दल सहमत हो गए और 14 जून 2007 को यूपीए तथा वाम दलों ने आधिकारिक तौर पर प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति पद का संयुक्त उम्मीदवार घोषित कर दिया.
भैरोसिंह शेखावत से हुआ सीधा मुकाबला
राष्ट्रपति चुनाव में यूपीए की उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल के सामने एनडीए ने तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत को मैदान में उतारा. जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे शेखावत ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एक पुलिस कॉन्स्टेबल के रूप में की थी. बाद में वह तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने और देश के उपराष्ट्रपति भी रहे. उनके लंबे राजनीतिक अनुभव को देखते हुए एनडीए ने उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया. इसके बाद देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए प्रतिभा पाटिल और भैरोसिंह शेखावत के बीच सीधा मुकाबला शुरू हुआ.
साल 2007 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) ने प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया. चुनाव में उनका मुकाबला एनडीए के उम्मीदवार भैरोसिंह शेखावत से हुआ. प्रतिभा पाटिल ने लगभग तीन लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की और भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनने का इतिहास रच दिया. उन्होंने 25 जुलाई 2007 को देश की 12वीं राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली. उनका कार्यकाल 25 जुलाई 2012 तक रहा.
मेक्सिको के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित
1 जून 2019 को प्रतिभा पाटिल को विदेशियों को दिए जाने वाले मेक्सिको के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द एज़्टेक ईगल’ से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उन्हें पुणे में आयोजित एक विशेष समारोह में मेक्सिको की राजदूत मेल्बा प्रिया ने प्रदान किया. इस सम्मान को प्राप्त करने वाली वह भारत की दूसरी राष्ट्रपति बनीं.
इतिहास सिर्फ बड़े पदों से नहीं, बल्कि उन लोगों से बनता है जो नई राह दिखाते हैं. प्रतिभा पाटिल ने भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनकर यह साबित किया कि नेतृत्व क्षमता किसी लिंग की मोहताज नहीं होती. उनका सफर आज भी देश की लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है.

