मणिपुर में एक बार फिर हिंसा भड़कने और चार नागरिकों की हत्या को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने राज्य में शांति बहाल करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा है. खड़गे ने कहा कि मई 2023 से अब तक मणिपुर में 300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 24,530 लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं.
मल्लिकार्जुन खड़गे ने हालिया हिंसा में चार नागरिकों की हत्या की कड़ी निंदा की और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की. उन्होंने कहा कि मणिपुर में लंबे समय से जारी हिंसा का सबसे ज्यादा खामियाजा महिलाओं, बच्चों और कमजोर परिवारों को भुगतना पड़ रहा है. इसके बावजूद राज्य में स्थायी शांति बहाल नहीं हो सकी है.
राष्ट्रपति शासन और मुख्यमंत्री बदलने के बाद भी शांति नहीं
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू करने, मुख्यमंत्री बदलने और फिर अपनी सरकार स्थापित करने के बावजूद हालात में सुधार नहीं हुआ है. उनके मुताबिक, इन राजनीतिक बदलावों से राज्य में शांति स्थापित करने में मदद नहीं मिली.
खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मई 2023 में हिंसा शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री ने करीब 29 महीने तक मणिपुर का दौरा नहीं किया. उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में प्रधानमंत्री की ओर से दिए गए आश्वासन भी जमीनी स्तर पर प्रभावी साबित नहीं हुए.
खड़गे ने कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती राज्य में लगातार हो रही हिंसा कानून-व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है.
अमित शाह की शांति समिति का क्या हुआ?
मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के सामने तीन प्रमुख सवाल रखे. उन्होंने पूछा कि जून 2023 में अमित शाह की ओर से गठित शांति समिति का क्या हुआ और राज्य में शांति बहाल करने के लिए अब तक कौन से ठोस कदम उठाए गए हैं.
उन्होंने यह भी सवाल किया कि संवेदनशील सीमावर्ती राज्य में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और लगातार बनी हुई सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने क्या कार्रवाई की है.
कांग्रेस अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति की सिफारिशों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि समिति की सिफारिशों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है और हजारों लोग अभी भी विस्थापित होकर राहत शिविरों में रहने को क्यों मजबूर हैं.
खड़गे ने राहत शिविरों में रह रहे लोगों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी राहत शिविरों में 31 अप्राकृतिक मौतों का मुद्दा उठाया है. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि विस्थापित परिवारों, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं.
300 से अधिक मौतों के बाद जवाबदेही किसकी?
मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने तीसरे सवाल में राज्य में जारी हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की. उन्होंने कहा कि तीन साल से अधिक समय बीतने, 300 से ज्यादा लोगों की मौत होने, राष्ट्रपति शासन लागू होने और मुख्यमंत्री बदले जाने के बाद भी मणिपुर में स्थायी शांति स्थापित नहीं हो सकी है.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से पूछा कि शासन की इस विफलता की जिम्मेदारी कौन लेगा. उन्होंने सवाल किया कि केंद्र सरकार ठोस कदम कब उठाएगी और कितने और निर्दोष लोगों की जान जाने के बाद स्थिति को संभालने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाएगी.


