कोलकाता : पश्चिम बंगाल के चोरबागान में दुर्गा पूजा के दौरान हुई भगदड़ की जांच अब राज्य सरकार अपने स्तर पर कराएगी. कलकत्ता हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह जांच की निगरानी नहीं करेगा. अदालत ने कहा कि अगर हाईकोर्ट के चीफ जज किसी मौजूदा जज को जांच आयोग का अध्यक्ष बनाने के लिए उपलब्ध नहीं कराते हैं, तो राज्य सरकार किसी रिटायर्ड जज को यह जिम्मेदारी दे सकती है.
बता दें, बीते 17 अक्टूबर 2026 को चोरबागान सार्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई थी. मृतकों में सात साल का एक बच्चा भी शामिल था. घटना में लापरवाही, भीड़ प्रबंधन में चूक और अव्यवस्था के आरोपों की जांच की मांग को लेकर तपस कुमार डे ने कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी.
चीफ जज रवींद्र विठ्ठलराव घुगे और जस्टिस शब्बर रशीदी की पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि जांच आयोग बनाने और उसके कामकाज की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी. आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा और उसके बाद रिपोर्ट पर कार्रवाई करने का फैसला भी सरकार ही करेगी.

चीफ जज को भेजा गया था पत्र
राज्य सरकार ने पहले ही हाईकोर्ट के चीफ जज को पत्र लिखकर जांच आयोग की अध्यक्षता के लिए एक मौजूदा जज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था. हालांकि, किसी जज को इस काम के लिए भेजने का फैसला चीफ जज को प्रशासनिक स्तर पर करना है.
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कोई मौजूदा जज उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो सरकार जांच आयोग अधिनियम, 1952 के तहत किसी सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज को नियुक्त कर सकती है. अदालत ने इस संबंध में कोई बाध्यकारी निर्देश नहीं दिया, बल्कि राज्य सरकार को कानून के मुताबिक फैसला लेने की छूट दी.
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंद्योपाध्याय ने दलील दी कि दुर्गा पूजा पंडालों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अक्सर संकरी गलियों से प्रवेश के रास्ते बनाए जाते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद दुर्गा पूजा समितियों में हुए बदलाव के कारण कुछ अनुभवहीन लोगों को आयोजन की जिम्मेदारी दी गई.
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि चोरबागान जैसे थीम आधारित पंडालों में सजावटी ढांचे, ऊंचे मंच, हवा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होना और कम रोशनी जैसी स्थितियों ने खतरा बढ़ाया. इसके साथ ही पुलिस और प्रबंधन कर्मियों की कमी के कारण हालात बिगड़ गए. इलाके में अचानक हुई बारिश ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया.
सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड की भी होनी है जांच
राज्य सरकार ने जांच के लिए जिन बिंदुओं का प्रस्ताव दिया है, उनमें भगदड़ के कारणों का पता लगाना और घटना से पहले तथा उसके दौरान हुए घटनाक्रम की पड़ताल करना शामिल है. इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, पुलिस थाने के रिकॉर्ड और कंट्रोल रूम के लॉग की जांच भी प्रस्तावित है.
जांच में यह भी पता लगाया जाना है कि आयोजन के दौरान भीड़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे या नहीं.
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बिल्लवदल भट्टाचार्य ने अदालत में कहा कि सरकार पहले ही चीफ जज से जांच के लिए जज उपलब्ध कराने का अनुरोध कर चुकी है. ऐसे में याचिका पर विस्तार से सुनवाई करने की जरूरत नहीं है.
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में जजों की संख्या का मुद्दा भी उठा. अदालत ने बताया कि यहां जजों के 72 पद स्वीकृत हैं, लेकिन फिलहाल 50 जज कार्यरत हैं. जस्टिस शम्पा दत्त (पॉल) 27 अक्टूबर 2026 को और जस्टिस अपूर्व सिन्हा रे 25 नवंबर 2026 को रिटायर्ड होने वाले हैं. इसके बाद कार्यरत जजों की संख्या घटकर 48 रह जाएगी.
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