कोई कंपनी गोपनीयता समझौते का हवाला देकर अपने पूर्व कर्मचारी को प्रतिद्वंद्वी (Rival) कंपनी में नौकरी करने से नहीं रोक सकती. बेंगलुरु की अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए EOX Vantage Private Limited का मुकदमा खारिज कर दिया. कंपनी ने अपनी पूर्व कर्मचारी श्रुति बीएस पर गोपनीय जानकारी लीक करने, कर्मचारियों को दूसरी कंपनी में ले जाने और ग्राहकों को तोड़ने का आरोप लगाया था.
अतिरिक्त सिटी सिविल एंड सेशंस जज जेवी कुलकर्णी ने 6 अक्टूबर को कहा कि कंपनियां अपने व्यापारिक रहस्यों, ग्राहकों के डेटा, कीमतों और दूसरी संवेदनशील जानकारियों की सुरक्षा कर सकती हैं. लेकिन गोपनीयता की शर्त लगाकर किसी कर्मचारी को अपने पेशे में आगे बढ़ने या अपने अनुभव और कौशल का इस्तेमाल करने से नहीं रोक सकतीं. भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 27 के तहत ऐसे प्रतिबंध अमान्य हो सकते हैं.
20 लाख से अधिक के नुकसान का दावा
EOX Vantage का आरोप था कि श्रुति ने नौकरी छोड़ने के बाद कुछ पूर्व कर्मचारियों के साथ मिलकर कंपनी की गोपनीय जानकारी प्रतिस्पर्धियों तक पहुंचाई. कंपनी ने दावा किया कि आंतरिक जांच में कॉन्ट्रैक्ट और कीमतों से जुड़ा डेटा निजी ईमेल पर भेजे जाने की बात सामने आई. इससे कंपनी को 20 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ. कंपनी ने अदालत से श्रुति को कर्मचारियों और ग्राहकों को अपने साथ ले जाने तथा गोपनीय जानकारी साझा करने से रोकने की मांग की थी.

श्रुति ने आरोपों से इनकार किया. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कारणों से अप्रैल 2022 में इस्तीफा दिया था, जिसे कंपनी ने स्वीकार कर लिया था. जांच के बाद कंपनी ने उन्हें रिलीविंग लेटर भी जारी किया था.
सबूतों के अभाव में खारिज हुआ मुकदमा
अदालत ने पाया कि कंपनी की आंतरिक जांच रिपोर्ट श्रुति के खिलाफ किसी खास गड़बड़ी को साबित नहीं करती. जिन कर्मचारियों की व्हाट्सऐप बातचीत और ईमेल को सबूत बनाया गया, उनसे अदालत में पूछताछ नहीं हुई. फॉरेंसिक जांच करने वालों की पहचान और गवाही भी सामने नहीं आई. इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से डेटा चोरी या कर्मचारियों को दूसरी जगह ले जाने की पुष्टि नहीं हुई.
अदालत ने यह भी कहा कि कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि श्रुति ने किसी प्रतिद्वंद्वी कंपनी में नौकरी की या उसके ग्राहकों को अपने साथ जोड़ा. जांच में शामिल कंपनी के सीईओ और सीओओ ने भी गवाही नहीं दी. अदालत ने आठ महीने की जांच के बाद श्रुति को रिलीविंग लेटर जारी करने पर भी सवाल उठाया.
अदालत के मुताबिक, कंपनी के आरोप आशंकाओं पर आधारित थे और कथित नुकसान भी साबित नहीं हुआ. इसके बाद अदालत ने मुकदमा खारिज करते हुए कंपनी को मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया. मामले में कंपनी की ओर से अधिवक्ता एनबी नरसिम्हा मूर्ति ने पैरवी की.
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