भारत के ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में योगदान देने वाले वरिष्ठ शिल्पकार और आभूषण कारोबारी वुम्मिदी एथिराज का बुधवार, 21 अक्टूबर को निधन हो गया. वह 99 वर्ष के थे. उनके निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शोक व्यक्त किया.
एथिराज का नाम उस सेंगोल के निर्माण से जुड़ा है, जिसे 1947 में देश की आजादी के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था. मई 2023 में नए संसद भवन में सेंगोल की स्थापना के बाद उनके योगदान को देशभर में व्यापक पहचान मिली थी.
वुम्मिदी एथिराज कौन थे?
वुम्मिदी एथिराज चेन्नई के प्रतिष्ठित वुम्मिदी बंगारू ज्वैलर्स परिवार के वरिष्ठ सदस्य थे. यह परिवार लंबे समय से आभूषण निर्माण और पारंपरिक स्वर्णकारी कला से जुड़ा रहा है. परिवार के संस्थापक वुम्मिदी बंगारू चेट्टी ने वर्ष 1900 में इस आभूषण प्रतिष्ठान की स्थापना की थी.

एथिराज का जन्म 25 नवंबर 1926 को हुआ था. उनका जीवन पारंपरिक आभूषण निर्माण की उसी विरासत से जुड़ा रहा, जिसमें सोने और चांदी पर बारीक कारीगरी के जरिए सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व की वस्तुएं तैयार की जाती हैं. सेंगोल के निर्माण में उनकी भूमिका ने उन्हें भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय से जोड़ दिया.
सेंगोल क्या है?
सेंगोल एक राजदंड है, जिसे भारतीय परंपरा में सत्ता, न्याय और शासन की जिम्मेदारी के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. यह तमिल शब्द से जुड़ा है, जिसका संबंध न्यायपूर्ण और नैतिक शासन से है. 1947 में भारत की स्वतंत्रता के समय इसे सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था.
सेंगोल का निर्माण चेन्नई के वुम्मिदी बंगारू चेट्टी के आभूषण प्रतिष्ठान में कराया गया था. इसे चांदी से बनाया गया और इस पर सोने की परत चढ़ाई गई. इसकी लंबाई करीब पांच फीट है तथा शीर्ष पर नंदी की आकृति बनी हुई है. इसे तैयार करने में वुम्मिदी एथिराज और उनके भाई की भूमिका थी.
स्वतंत्रता से पहले 14 अगस्त 1947 को आयोजित समारोह में सेंगोल नेहरू को सौंपा गया था. मई 2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास स्थापित किया. इस मौके पर एथिराज भी मौजूद थे. प्रधानमंत्री ने उनसे मुलाकात कर सेंगोल के निर्माण में उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया.
राष्ट्रपति ने जताया शोक
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वुम्मिदी एथिराज के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी. उन्होंने उनके निधन को भारतीय पारंपरिक शिल्पकला के लिए क्षति बताया और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की.
पीएम मोदी ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एथिराज के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि एथिराज को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भेंट किए गए ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में उनके प्रयासों के लिए हमेशा याद किया जाएगा.
प्रधानमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि वर्ष 2023 में नए संसद भवन में सेंगोल को सम्मानजनक स्थान देने के अवसर पर उन्हें एथिराज से मिलने और देश तथा संस्कृति के लिए उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर मिला था. उन्होंने एथिराज के परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी.
परिवार में पत्नी और तीन बेटे
एथिराज की पत्नी सुमित्रा वुम्मिदी का निधन उनसे पहले हो चुका था. उनके परिवार में तीन बेटे—विजया भारती, उदय कुमार वुम्मिदी और विजयेंद्रन वुम्मिदी—हैं. उनके पोते-पोतियां और परपोते-परपोतियां भी हैं.
वुम्मिदी एथिराज का जीवन भारतीय पारंपरिक शिल्पकला और आभूषण निर्माण की विरासत से जुड़ा रहा. सेंगोल के निर्माण में उनके योगदान ने उन्हें ऐसी ऐतिहासिक वस्तु से जोड़ दिया, जो स्वतंत्रता के समय के एक महत्वपूर्ण प्रसंग और आधुनिक संसद भवन, दोनों से संबंधित है.
Also Read : मणिपुर में अब भी बह रहा खून, बीजेपी शांति बहाल करने में नाकाम : मल्लिकार्जुन खड़गे


