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    Home»ट्रेंडिंग»लेंसकार्ट विवाद: तिलक-शिखा हटाने के आरोपों पर कंपनी ने मांगी माफी, जारी की नई गाइडलाइन्स
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    लेंसकार्ट विवाद: तिलक-शिखा हटाने के आरोपों पर कंपनी ने मांगी माफी, जारी की नई गाइडलाइन्स

    Team JoharBy Team JoharApril 20, 2026No Comments3 Mins Read1
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    Mumbai:  भारत की प्रमुख आईवियर कंपनी लेंसकार्ट इन दिनों धार्मिक भेदभाव के आरोपों को लेकर चर्चा में है। सूरत के एक युवक, झील सोगासिया ने कंपनी के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। युवक का दावा है कि मुंबई में ट्रेनिंग के दौरान उसे अपनी धार्मिक आस्था के प्रतीकों तिलक और शिखा को हटाने के लिए कहा गया था। युवक के अनुसार, जब उन्होंने अपनी भावनाओं का सम्मान करते हुए इसे मानने से इनकार कर दिया, तो उन्हें ट्रेनिंग प्रोग्राम से बाहर कर दिया गया।

    वायरल डॉक्यूमेंट और सोशल मीडिया पर आक्रोश

    यह विवाद तब और गहरा गया जब फरवरी 2026 का एक इंटरनल ‘ग्रूमिंग पॉलिसी’ डॉक्यूमेंट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस दस्तावेज में बिंदी, तिलक और कलाई के धागों जैसे हिंदू धार्मिक प्रतीकों पर प्रतिबंध का उल्लेख था, जबकि हिजाब और पगड़ी को अनुमति दी गई थी। इस नीतिगत असमानता को देखकर सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश देखा गया और लोगों ने #BoycottLenskart के साथ कंपनी की आलोचना शुरू कर दी।

    पीयूष बंसल ने मांगी माफी

    मामले की गंभीरता को देखते हुए लेंसकार्ट के फाउंडर और सीईओ पीयुष बंसल ने स्थिति स्पष्ट की। बंसल ने वायरल हुए डॉक्यूमेंट को “पुराना और आउटडेटेड” बताते हुए स्पष्ट किया कि यह कंपनी की मौजूदा गाइडलाइंस का हिस्सा नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि डॉक्यूमेंट में धार्मिक प्रतीकों को लेकर की गई टिप्पणी गलत थी और उसे पहले ही हटा दिया जाना चाहिए था। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर माफी मांगते हुए कहा कि यदि किसी पुरानी संचार नीति से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वे इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं।

    कंपनी ने जारी की नई समावेशी नीति

    विवाद पर विराम लगाने के लिए लेंसकार्ट ने नई इन-स्टोर स्टाइल गाइड जारी की है। नई नीति के तहत स्पष्ट किया गया है कि बिंदी, तिलक, सिंदूर, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे सभी सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीकों का कंपनी में पूरा स्वागत है। लेंसकार्ट ने अपने बयान में कहा, “ये प्रतीक हमारे लिए अपवाद नहीं, बल्कि हमारी पहचान का हिस्सा हैं। लेंसकार्ट भारतीयों द्वारा, भारतीयों के लिए बनाई गई कंपनी है।”

    कार्यस्थल पर धार्मिक स्वतंत्रता की बहस

    इस घटना ने कॉर्पोरेट जगत में ‘धार्मिक स्वतंत्रता बनाम पेशेवर ग्रूमिंग स्टैंडर्ड’ की बहस को फिर से जिंदा कर दिया है। जहां एक ओर युवक के दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी शेष है, वहीं दूसरी ओर लेंसकार्ट के इस कदम को सुधार की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। कंपनी ने अब अपनी नीतियों को अधिक सार्वजनिक और पारदर्शी बनाने का फैसला लिया है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी गलतफहमी से बचा जा सके।

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