Ranchi : राजधानी रांची के धुर्वा स्थित जगन्नाथ (प्रभात तारा) मैदान में रविवार को कुड़मी समाज की बड़ी महारैली हुई। वृहद झारखंड कुड़मी समन्वय समिति के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य के अलग अलग जिलों से हजारों लोग पहुंचे। मैदान सुबह से ही लोगों की भीड़ से भरने लगा था। पारंपरिक पहनावे में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग पूरे जोश के साथ शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के मुख्य संयोजक शीतल ओहदार ने की। संचालन राजेंद्र महतो और सखीचंद महतो ने किया। मंच पर समाज के कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
एसटी दर्जा और भाषा को मान्यता की मांग
रैली में सबसे बड़ी मांग यही रही कि कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति यानी एसटी की सूची में शामिल किया जाए। साथ ही कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह देने की बात भी जोरदार तरीके से उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि ये मांग नई नहीं है, समाज लंबे समय से इसे लेकर आवाज उठा रहा है। मुख्य संयोजक शीतल ओहदार ने कहा कि कुड़मी समाज 75 साल से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य बनने में समाज की अहम भूमिका रही है, लेकिन आज भी उन्हें उनका हक नहीं मिला। उनका कहना था कि 6 सितंबर 1950 के फैसले के बाद समाज को जनजातीय अधिकारों से अलग कर पिछड़ा वर्ग में डाल दिया गया।
इतिहास का हवाला देकर उठाई बात
ओहदार ने कहा कि अंग्रेजों के समय की जनगणना में कुड़मियों को जनजातीय श्रेणी में रखा गया था। आजादी के बाद उन्हें उस सूची से हटा दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन इलाकों में खनिज संपदा ज्यादा है, वहां रहने वाले समाज को अधिकारों से दूर रखा गया।
आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी
पूर्व विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने साफ शब्दों में कहा कि अगर सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो पूरे झारखंड में अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी। उन्होंने कहा कि समाज अब और इंतजार के मूड में नहीं है।
जनगणना में सही पहचान दर्ज कराने की अपील
शिक्षाविद डॉ. अमर कुमार चौधरी ने लोगों से अपील की कि आने वाली जनगणना में अपनी जाति कुड़मी और भाषा कुड़माली ही लिखवाएं। उनका कहना था कि सही पहचान दर्ज होना बहुत जरूरी है, तभी समाज की ताकत सामने आएगी।

शिक्षा और राजनीति में आगे बढ़ने की बात
भाजपा विधायक नागेंद्र महतो ने कहा कि शिक्षा और राजनीतिक भागीदारी कम होने की वजह से समाज पीछे रह गया है। उन्होंने युवाओं से पढ़ाई पर ध्यान देने और संगठित होकर आगे बढ़ने की अपील की। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि राज्य बनने के बाद भी कुड़मी समाज को आरक्षण व्यवस्था का पूरा लाभ नहीं मिल पाया। इससे युवाओं में बेरोजगारी बढ़ी है और सरकारी नौकरियों में भागीदारी कम है।
महिलाओं की भी मजबूत मौजूदगी
समाज की महिला अध्यक्ष सुषमा महतो ने कहा कि बाईसी प्रथा आज भी समाज की पहचान है। उन्होंने कहा कि पेसा कानून को ठीक से लागू करने के लिए कुड़मियों को एसटी सूची में शामिल करना जरूरी है।
कई प्रस्ताव हुए पारित
महारैली में कई अहम प्रस्ताव पास किए गए। इसमें तय किया गया कि जनगणना में कुड़मी जाति और कुड़माली भाषा जरूर दर्ज कराई जाएगी। बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया जाएगा। युवाओं को आधुनिक खेती और स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। समाज के पढ़े लिखे लोग तकनीकी शिक्षा और रोजगार मार्गदर्शन के लिए नियमित कार्यक्रम चलाएंगे।
कार्यक्रम में रणधीर चौधरी, संजय लाल महतो, थानेश्वर महतो, रामचंद्र महतो, कपिल देव महतो और पार्वती देवी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। हजारों महिला और पुरुषों की भागीदारी ने साफ कर दिया कि समाज अपने अधिकारों को लेकर अब खुलकर मैदान में उतर चुका है।
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