रांची : जेपीएससी( झारखंड लोक सेवा आयोग) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के मामले में सीआईडी की जांच टीम ने टीडीपीएल के एक अन्य अहम कड़ी मो. एबाद की भूमिका का खुलासा किया है. सीआईडी की टीम ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या निवासी मो. एबाद टीडीपीएल कंपनी में बिना किसी नियुक्ति पत्र के तकनीकी सहायक के रूप में काम कर रहा था. उसकी जिम्मेदारी परीक्षा में सेटिंग कराने वाले अभ्यर्थियों और कथित षड्यंत्र में शामिल लोगों के बीच संपर्क स्थापित करने की थी.
टीडीपीएल के अधिकारियों, दलाल अभय कुमार तिवारी और जेपीएससी की परीक्षा नियंत्रक प्रभारी श्वेता कुमारी गुप्ता के निर्देश पर अभ्यर्थियों से संपर्क करता था. सीआईडी की जांच में उसके खिलाफ मोबाइल कॉल डिटेल, पहले से मिली लिखित शिकायत, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और गवाहों के बयान जैसे कई महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए हैं.
बिना नियुक्ति पत्र के टीडीपीएल में कर रहा था काम
सीआईडी की अनुसंधान टीम के मुताबिक, मो. एबाद के पिता का नाम अब्दुल सलाम है और उसका स्थायी पता ग्राम रोनाही, जिला अयोध्या, उत्तर प्रदेश है. रांची में वह लालपुर थाना क्षेत्र के वर्द्धमान कंपाउंड स्थित आनन्दमती अपार्टमेंट के पास टीडीपीएल के आवास सह कार्यालय में रहता था. मो. उरमान ने बिना नियुक्ति पत्र के तकनीकी सहायता के काम पर रखा था. इस वजह से उसे टीडीपीएल के परीक्षा संबंधी कार्यों और कार्यालय तक पहुंच हासिल थी.
आरोप है कि वह अभय कुमार तिवारी और जेपीएससी की परीक्षा नियंत्रक प्रभारी श्वेता कुमारी गुप्ता के निर्देश पर अभ्यर्थियों से मिलता था और उनके साथ संपर्क स्थापित करने का काम करता था. इस तरह वह कथित तौर पर सेटिंग वाले अभ्यर्थियों और परीक्षा में हेरफेर करने वाले लोगों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बना हुआ था.
ओएमआर शीट में परीक्षा के बाद भरे जाते थे खाली गोले
सीआईडी की जांच में परीक्षा में गड़बड़ी का एक कथित संगठित तरीका भी सामने आया है. अनुसंधान के अनुसार, टीडीपीएल के निदेशकों, कर्मचारियों, जेपीएससी के कुछ पदाधिकारियों और दलालों के बीच आपराधिक षड्यंत्र के तहत चयनित अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान केवल उन्हीं प्रश्नों के उत्तर भरने को कहा जाता था, जिनके जवाब उन्हें पता होते थे. बाकी प्रश्नों के गोले खाली छोड़ने का निर्देश दिया जाता था.
परीक्षा समाप्त होने के बाद इन ओएमआर शीट को टीडीपीएल के कार्यालय में लाया जाता था और खाली छोड़े गए गोलों को कथित तौर पर मनचाहे उत्तर के अनुसार भर दिया जाता था. इतना ही नहीं, मुख्य परीक्षा की बारकोड वाली उत्तरपुस्तिकाओं में पीडीएफ एडिटर के माध्यम से अंक बढ़ाने और इसके बाद बैकएंड सर्वर के डेटा में बदलाव करने का भी आरोप है. जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिए सेटिंग वाले अभ्यर्थियों के परिणाम को प्रभावित करने की कोशिश की गई.
छह महीने पहले ही जेपीएससी अध्यक्ष को मिली थी शिकायत
मो. एबाद की भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि प्राथमिकी दर्ज होने से छह महीने से भी अधिक समय पहले ही जेपीएससी अध्यक्ष को उसके खिलाफ लिखित शिकायत मिली थी. दस्तावेजी साक्ष्य के अनुसार, बेंगलुरु निवासी सौरम बर्मन ने 1 जनवरी 2026 को पत्र संख्या 01/2026 के माध्यम से JPSC अध्यक्ष को शिकायत भेजी थी. इसमें टीडीपीएल द्वारा आयोजित परीक्षाओं में अभय कुमार तिवारी, मो. उरमान और मो. एबाद पर ओएमआर जवाब शीट, डिजिटल एवेल्एशन प्रोसेस और अंकों में अनधिकृत बदलाव करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे.
इसके अगले दिन यानी 2 जनवरी 2026 को भी इसी संबंध में ई-मेल के माध्यम से शिकायत की गई थी. इसमें भी इन तीनों के नाम का उल्लेख करते हुए परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जानकारी दी गई थी. जांच एजेंसी के मुताबिक, ये शिकायतें प्राथमिकी दर्ज होने से काफी पहले की हैं. इसलिए इन्हें मो. एबाद की कथित भूमिका की पूर्ववर्ती पुष्टि करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य माना गया है.
मोबाइल नंबरों के तकनीकी विश्लेषण में मिले संपर्क
अनुसंधान के दौरान मो. एबाद के मोबाइल नंबर का तकनीकी विश्लेषण किया गया. इसमें सह अभियुक्त मो. उरमान, हेमंत कुमार वर्मा, संजय कुमार और रक्षक सिंह के साथ उसके संपर्क की जानकारी मिली. इसके अलावा टीडीपीएल के सीईओ दीपक बोरा और गोपाल कुमार के नाम पर पंजीकृत, लेकिन मो. उरमान द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबर से भी उसके संपर्क की बात सामने आई है. जेपीएससी वन क्षेत्र पदाधिकारी परीक्षा के अभ्यर्थी और इस कांड के सह अभियुक्त रक्षक सिंह के मोबाइल का विश्लेषण करने पर भी मो. एबाद से संपर्क के साक्ष्य मिले. जांच में अन्य अभ्यर्थियों के साथ सीधे संपर्क की जानकारी भी सामने आई है. जांच एजेंसी का मानना है कि इन संपर्कों से अभ्यर्थियों और टीडीपीएल के लोगों के बीच उसकी भूमिका तथा संदिग्ध गतिविधियों की कड़ियां जुड़ती हैं.
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पांच अभ्यर्थियों की ओएमआर में परीक्षा के बाद हुई थी छेड़छाड़
इस मामले में टीडीपीएल के AWS क्लाउड डेटा, सीसीटीवी फुटेज और ओएमआर शीट की तुलनात्मक जांच को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया गया है. जांच के अनुसार, सुमन सौरभ, अरविंद कुमार, ओम प्रकाश राणा, वंदना कुमारी और रक्षक सिंह की ओएमआर शीट में परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तर भरे जाने के तथ्य सामने आए हैं.
जांच एजेंसी का दावा है कि ओएमआर में इस तरह की छेड़छाड़ उसी तरीके से की गई, जिसका उल्लेख सौरम बर्मन ने अपनी शिकायत में किया था. डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और मूल ओएमआर शीट की तुलना से कथित हेरफेर की प्रक्रिया को समझने में मदद मिली है.
जेपीएससी अध्यक्ष के आप्त सचिव ने भी दी गवाही
इस मामले में जेपीएससी अध्यक्ष के आप्त सचिव मनोरंजन कुमार का बयान भी दर्ज किया गया है. बीएनएसएस की धारा 180 के तहत दिए गए बयान में उन्होंने बताया कि कर्नाटक के सौरम बर्मन की ओर से अध्यक्ष के नाम एक ई-मेल प्राप्त हुआ था. इसमें अभय तिवारी, मो. उरमान, मो. एबाद और टीडीपीएल के माध्यम से परीक्षा में गड़बड़ी किए जाने का उल्लेख था.
आप्त सचिव के अनुसार उन्होंने यह ई-मेल जेपीएससी अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत किया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी.
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जिस फ्लैट में रहता था एबाद, वहीं से जब्त हुए कंप्यूटर और हार्ड डिस्क
इस मामले में वर्द्धमान कंपाउंड स्थित फ्लैट की भूमिका भी महत्वपूर्ण है. फ्लैट की निवासी रेखा यादव, पति मनोज यादव ने अपने बयान में बताया कि उनके फ्लैट में टीडीपीएल के रामवीर सिंह, सत्यपाल सिंह, पीके सिंह, हेमंत, संजय, उरमान और एबाद रहते थे.
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह वही फ्लैट है जहां से टीडीपीएल के कंप्यूटर और सर्वर की हार्ड डिस्क जब्त की गई थी. इस फ्लैट का रेंट एग्रीमेंट अभय तिवारी के साले सौरभ कुमार पांडेय के साथ हुआ था और फ्लैट का किराया भी वही भुगतान करते थे. इससे जांच एजेंसी को फ्लैट, टीडीपीएल के कर्मचारियों और कथित परीक्षा घोटाले के बीच संबंधों की एक और महत्वपूर्ण कड़ी मिली है.
जांच एजेंसी का दावा, परीक्षा परिणाम प्रभावित करने की थी साजिश
अनुसंधान में जुटाए गए दस्तावेजी, इलेक्ट्रॉनिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसी का दावा है कि मो. एबाद ने टीडीपीएल के तकनीकी सहायक के रूप में काम करते हुए मो. उरमान, टीडीपीएल के निदेशकों, दलाल अभय कुमार तिवारी और जेपीएससी की परीक्षा नियंत्रक प्रभारी श्वेता कुमारी गुप्ता के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र में भूमिका निभाई.
आरोप है कि इस षड्यंत्र के तहत सेटिंग वाले अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट और मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं में हेरफेर कर परीक्षा परिणाम प्रभावित करने की कोशिश की गई.


