रांची : आदेश का समय पर पालन नहीं करने और बार-बार समय मांगने पर झारखंड़ हाईकोर्ट ने जेएसएससी और सरकार के रवैये पर नाराजगी जतायी है. गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल और जेएसएससी के सचिव सुधीर कुमार गुप्ता के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया है. यह नोटिस चीफ जस्टिस एमएस सोनक व जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने जारी किया.
इसके तहत दोनों से पूछा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना अधिनियम 1971 के तहत कार्रवाई क्यों नहीं किया जाए. दोनों अधिकारियों को 15 अक्टूबर तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. इसकी अग्रिम प्रति एमिकस क्योरी मनोज टंडन को देनी होगी. सरकार ने 6 सप्ताह और जेएसएससी ने 5 महीने का अतिरिक्त समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया.
खंडपीठ ने 1 अप्रैल 2026 के आदेश के पैराग्राफ 14 व 15 में दिए निर्देशों का पालन 30 नवंबर 2026 तक करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि जेएसएससी और राज्य सरकार एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं. जबकि, दोनों अपने स्तर पर आदेश का पालन करने के लिए बाध्य है.
खंडपीठ में 25 जून के आदेश का हवाला देते हुए कहा की अधिकारियों को समस्याएं गिनाने के बजाय समाधान तलाशना चाहिए था. इसके बावजूद वही रवैया दोहराए जाने पर कोर्ट ने इसे आदेशों, आश्वासन और अंडरटेकिंग का प्रथम दृष्ट्या जानबूझकर उल्लंघन माना.
यह पूरा मामला जेलों में रिक्त पद भरने और व्यवस्था में सुधार से संबंधित स्वतः संज्ञान जनहित याचिका का है.

