विजय उराँव, रांची
रांची. झारखंड के धनबाद जिले में अवैध कोयला खनन और कोयला चोरी के खिलाफ पिछले तीन वर्षों में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई है. केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि वर्ष 2024 से 22 जुलाई 2026 तक जिले में 1,499 छापेमारी की गई.
इन अभियानों के दौरान 1,108 अवैध कोयला खदानों को बंद कराया गया, 26,740.31 मीट्रिक टन अवैध कोयला जब्त किया गया और 32 लोगों को गिरफ्तार किया गया.
सरकार का कहना है कि जिला प्रशासन, पुलिस, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के संयुक्त अभियान के कारण अवैध खनन के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है.
यह जानकारी कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने लोकसभा में झारखंड के सांसद नलिन सोरेन के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी. सांसद ने धनबाद के सिंदरी-तासरा क्षेत्र में कथित अवैध कोयला खनन और तस्करी को लेकर सरकार से सवाल पूछा था. जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के तासरा ओपन कास्ट प्रोजेक्ट में अवैध खनन या कोयला तस्करी की कोई घटना रिपोर्ट नहीं हुई है. हालांकि, पूरे धनबाद जिले में अवैध खनन रोकने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है.
सरकार द्वारा सदन में रखे गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में 499 छापेमारी कर 337 अवैध खदानों को बंद कराया गया. इस दौरान 9,505.06 मीट्रिक टन अवैध कोयला जब्त किया गया और 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया. वर्ष 2025 में कार्रवाई और तेज हुई. इस दौरान 675 छापेमारी में 477 अवैध खदानों को बंद कराया गया, 12,562.10 मीट्रिक टन कोयला जब्त किया गया और 13 लोगों की गिरफ्तारी हुई.
वहीं वर्ष 2026 में 22 जुलाई तक 325 छापेमारी के दौरान 294 अवैध खदानों को बंद कराया गया. इस अवधि में 4,673.15 मीट्रिक टन अवैध कोयला जब्त किया गया और 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया. इसके अलावा खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत कई मामलों में शिकायत दर्ज कर न्यायालय में कार्रवाई भी शुरू की गई है.
सरकार ने लोकसभा में यह भी बताया कि अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर समन्वय को मजबूत किया गया है. अतिरिक्त सचिव, कोयला मंत्रालय की अध्यक्षता में कोल सेक्टर कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया गया है. वहीं जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में टास्क फोर्स बनाई गई है, जिसमें बीसीसीएल, जिला प्रशासन, पुलिस और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से कार्रवाई करती हैं.
अवैध खनन रोकने के लिए ड्रोन सर्विलांस, इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC), वाहन ट्रैकिंग सिस्टम, संयुक्त सुरक्षा चेक पोस्ट और खुफिया सूचना के आधार पर नियमित छापेमारी की जा रही है. परित्यक्त खदानों के मुहानों को कंक्रीट की दीवारों से बंद किया जा रहा है. इसके साथ ही ‘खानन प्रहरी’ मोबाइल ऐप और कोल माइन सर्विलांस एंड मैनेजमेंट सिस्टम (CMSMS) के जरिए आम लोगों से भी शिकायतें प्राप्त की जा रही हैं, ताकि अवैध खनन की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके.
गृह मंत्रालय की समीक्षा के बाद CISF का अभियान तेज
लोकसभा में पेश इन आंकड़ों के बीच हाल ही में CISF ने भी अवैध कोयला चोरी के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बीते 5 जुलाई को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद ‘जीरो कोल लीकेज’ अभियान के तहत पिछले तीन सप्ताह में 1,798.725 मीट्रिक टन अवैध कोयला जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1.08 करोड़ रुपये बताई गई है. इस दौरान 84 वाहन जब्त किए गए और 21 मामलों में शिकायत दर्ज की गई.
CISF के अनुसार, सबसे अधिक 1,063.91 मीट्रिक टन कोयला बीसीसीएल, धनबाद क्षेत्र से बरामद हुआ. इसके अलावा ईसीएल के शीतलपुर क्षेत्र से 450.13 मीट्रिक टन तथा सीसीएल और सीएमपी(एच) क्षेत्र से 284.715 मीट्रिक टन अवैध कोयला जब्त किया गया. एजेंसी ने यह भी बताया कि तस्करी में हाईवा ट्रकों के साथ-साथ मॉडिफाइड मोटरसाइकिलों का भी इस्तेमाल किया जा रहा था. अभियान के दौरान मानव खुफिया सूचना, CCTV निगरानी और रियल-टाइम मॉनिटरिंग का उपयोग किया गया.
लोकसभा में पेश आंकड़े और CISF की हालिया कार्रवाई यह दर्शाती है कि धनबाद सहित झारखंड के कोयला क्षेत्रों में अवैध खनन और कोयला चोरी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं. हालांकि, तीन वर्षों में 1,108 अवैध खदानें बंद करने और 26 हजार टन से अधिक कोयला जब्त होने के बावजूद यह समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है. यही कारण है कि केंद्र सरकार तकनीकी निगरानी, संयुक्त अभियान और कानून के सख्त अनुपालन के जरिए इस नेटवर्क पर लगातार दबाव बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है.
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