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    Home»झारखंड»झारखंड हाईकोर्ट ने बहाल की दो शिक्षिकाओं की नियुक्ति, डीएसई का आदेश रद्द
    झारखंड

    झारखंड हाईकोर्ट ने बहाल की दो शिक्षिकाओं की नियुक्ति, डीएसई का आदेश रद्द

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyJune 17, 2026Updated:June 17, 2026No Comments4 Mins Read6
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    हाईकोर्ट
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    Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल की दो शिक्षिकाओं सुचिता शर्मा और अर्चना कुमारी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी देने का आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार और रांची के जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) का वह फैसला रद्द कर दिया, जिसमें नियुक्ति को मंजूरी देने से इनकार किया गया था। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने साफ कहा कि दोनों शिक्षिकाओं की नियुक्ति पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई है, इसलिए उन्हें स्कूल में योगदान देने और काम करने की अनुमति मिलनी चाहिए।

    2023 में हुई थी नियुक्ति, बाद में अटक गई मंजूरी

    मामला डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल का है, जो एक भाषाई अल्पसंख्यक विद्यालय है। यहां 29 अप्रैल 2023 को सहायक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया था। इसके बाद चयन प्रक्रिया पूरी हुई और 12 मई 2023 को सुचिता शर्मा और अर्चना कुमारी को नियुक्ति पत्र दिया गया। दोनों ने 17 मई 2023 को योगदान भी दे दिया, लेकिन बाद में 30 जुलाई 2024 को जिला शिक्षा अधीक्षक ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों शिक्षिकाओं ने हाईकोर्ट का रुख किया।

    डीएसई ने दो कारणों से रोकी थी नियुक्ति

    डीएसई ने नियुक्ति पर रोक लगाने के पीछे दो मुख्य कारण बताए थे। पहला, उन्होंने डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल को अल्पसंख्यक संस्थान नहीं मानते हुए आरक्षण नीति के पालन पर सवाल उठाया था। दूसरा, दोनों शिक्षिकाओं की आयु 41 वर्ष से अधिक बताई गई थी, जबकि अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष तय की गई थी। राज्य सरकार ने भी कोर्ट में इसी पक्ष का समर्थन किया। सुनवाई के दौरान मुहम्मदों की ओर से 2009 के आरटीआई रिकॉर्ड और पहले के कोर्ट आदेश पेश किए गए, जिनमें साफ तौर पर डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल को भाषाई अल्पसंख्यक संस्थान बताया गया था। कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि यह स्कूल अल्पसंख्यक संस्थान ही है, इसलिए सरकार का यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    उम्र सीमा पर भी कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

    कोर्ट ने झारखंड प्राथमिक विद्यालय सहायक शिक्षक नियमावली 2022 का हवाला देते हुए कहा कि अगर लंबे समय तक नियुक्ति प्रक्रिया नहीं होती है, तो उम्मीदवारों को उम्र में छूट मिल सकती है। कोर्ट ने यह भी माना कि पिछली भर्ती 2012 में हुई थी और अगली 2023 में, ऐसे में उम्र में छूट देना उचित है। साथ ही 2023 के विज्ञापन में महिलाओं के लिए अधिकतम आयु सीमा 43 वर्ष थी, इसलिए दोनों शिक्षिकाएं उस दायरे में आती हैं।

    “नियम तय होने के बाद बदले नहीं जा सकते”

    हाईकोर्ट ने साफ टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी चयन प्रक्रिया के शुरू होने के बाद उसके नियमों को बदला नहीं जा सकता। अगर विज्ञापन में स्कूल को अल्पसंख्यक बताया गया था और प्रक्रिया उसी आधार पर आगे बढ़ी थी, तो बाद में अलग रुख अपनाना सही नहीं है। अदालत ने जिला शिक्षा अधीक्षक के रवैये पर नाराजगी जताई और इसे मनमाना और नौकरशाही शक्ति के दुरुपयोग का मामला बताया।कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों की वजह से दोनों शिक्षिकाओं को बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा, जो सही नहीं है।

    30 दिनों में नियुक्ति मंजूरी और वेतन देने का आदेश

    हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि जिला शिक्षा अधीक्षक 30 दिनों के भीतर दोनों शिक्षिकाओं की नियुक्ति को औपचारिक मंजूरी दें। इसके साथ ही 17 मई 2023 से सेवा लाभ देने और उसी तारीख से वेतन जारी करने का भी आदेश दिया गया है। हालांकि कोर्ट ने पिछला बकाया वेतन देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने राज्य के सभी सक्षम अधिकारियों को यह निर्देश दिया है कि अल्पसंख्यक विद्यालयों में नियुक्ति से जुड़े मामलों पर 60 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी देरी और विवाद दोबारा न हो।

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