Johar Live Desk : मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग अब और तेज होती जा रही है। लड़ाई का आज नौवां दिन है और दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर हमले और बयानबाजी कर रहे हैं। इसी बीच ईरान की सेना ने अमेरिका को सीधी चेतावनी दी है कि अगर उसके जहाज फारस की खाड़ी में आए तो उन्हें समुद्र में डुबो दिया जाएगा।
ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी
ईरानी सेना ने शनिवार को कहा कि अगर अमेरिकी नौसेना के जहाज फारस की खाड़ी में दाखिल होते हैं तो उन्हें निशाना बनाया जाएगा। ईरान का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका जल्द ही ऑयल टैंकरों की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत फारस की खाड़ी में भेज सकता है। आमतौर पर तेल के टैंकर Strait of Hormuz के रास्ते गुजरते हैं, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।
ट्रम्प का दावा- 3 दिनों में ईरान के 42 वॉरशिप तबाह
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया है कि पिछले तीन दिनों में अमेरिकी सेना ने ईरान के 42 नौसैनिक जहाजों को तबाह कर दिया है। उनके मुताबिक इन हमलों से ईरान की नौसेना को भारी नुकसान हुआ है और उसकी ताकत लगभग खत्म हो गई है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिकी हमलों में ईरान की एयरफोर्स और कम्युनिकेशन सिस्टम को भी बड़ा झटका लगा है।
इजराइल का दावा : 16 ईरानी सैन्य विमान गिराए
वहीं Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक इजराइली सेना का कहना है कि उसने अब तक ईरान के 16 सैन्य विमानों को मार गिराया है। इजराइल का दावा है कि इन हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हुई है।
ईरान में सिविल इलाकों को भी नुकसान
जंग का असर आम लोगों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में अब तक 6,668 सिविल इलाकों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों में 5,535 घर और 1,041 दुकानों को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 14 मेडिकल सेंटर्स और 65 स्कूल भी हमलों की चपेट में आए हैं। इस जंग में अब तक कुल 1,483 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं इजराइल में 1,765 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा राहत कार्य में लगी Iranian Red Crescent Society के 13 सेंटर भी हमलों का शिकार हुए हैं।
ट्रम्प बोले- ईरान अब ‘दबंग’ नहीं, ‘लूजर’ बन गया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान अब मिडिल ईस्ट का दबंग देश नहीं रहा। ट्रम्प का कहना है कि लगातार हो रहे अमेरिकी और इजराइली हमलों के दबाव में ईरान अब कमजोर पड़ गया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने अपने पड़ोसी देशों से माफी मांगी है और वादा किया है कि अब उन पर हमला नहीं करेगा।
ईरानी राष्ट्रपति ने पड़ोसी देशों से मांगी माफी
दरअसल ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने हाल ही में कहा था कि ईरान अपने पड़ोसी देशों पर तब तक हमला नहीं करेगा, जब तक उन देशों की जमीन से ईरान पर हमला नहीं किया जाता। उन्होंने पड़ोसी देशों से पहले हुए हमलों के लिए माफी भी मांगी थी।
IRGC ने शुरू की जवाबी हमलों की 27वीं लहर
इधर ईरान की सेना की ताकतवर इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ जवाबी हमलों की नई लहर शुरू करने का दावा किया है। ईरान के समाचार चैनल Press TV के मुताबिक IRGC ने इसे “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस” की 27वीं लहर बताया है। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका और इजराइल के हालिया हमलों के जवाब में की जा रही है।
कुवैत में अमेरिकी सैन्य अड्डे को बनाया निशाना
रिपोर्ट के मुताबिक IRGC ने कुवैत के अरिफजान इलाके में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे के मुख्यालय को सटीक मिसाइलों से निशाना बनाया है। हालांकि इस हमले से कितना नुकसान हुआ है, इसकी अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
कुवैत में ड्रोन हमला, एयरपोर्ट के फ्यूल डिपो में लगी आग
वहीं कुवैत शहर में ड्रोन हमलों के बाद एक सरकारी इमारत को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार अल सूर इलाके में स्थित पब्लिक इंस्टीट्यूशन फॉर सोशल सिक्योरिटी के मुख्यालय को ड्रोन से निशाना बनाया गया। करीब 22 मंजिला इस इमारत को भौतिक नुकसान हुआ है। राहत की बात यह रही कि सुरक्षा कर्मियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी के घायल होने की खबर नहीं है। इसके अलावाकुवैत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा के दो फ्यूल डिपो पर भी ड्रोन हमला हुआ। इनमें से एक डिपो में भीषण आग लग गई। नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के मुताबिक आग बुझाने के लिए राहत और बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं।
Also Read : झारखंड में बदलेगा मौसम का मिजाज, कई जिलों में बारिश और वज्रपात की संभावना

