Ranchi : हेमंत सरकार ने राजस्व वसूली को और तेज और पारदर्शी बनाने के लिए अहम फैसला लिया है। अब एक करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सरकार को जमा करनी होगी तो उसके लिए सिर्फ NEFT और RTGS का ही इस्तेमाल करना होगा। वित्त विभाग ने इस संबंध में सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव और विभागाध्यक्षों को पत्र भेजकर साफ निर्देश दे दिए हैं।
आखिर NEFT और RTGS होते क्या हैं?
सरल भाषा में समझें तो ये दोनों पैसे भेजने के डिजिटल तरीके हैं। NEFT (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर) में पैसा बैच सिस्टम से जाता है। यानी थोड़े-थोड़े समय के अंतराल पर ट्रांजैक्शन प्रोसेस होते हैं। RTGS (रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) में पैसा तुरंत ट्रांसफर हो जाता है। जैसे ही आप भेजते हैं, सामने वाले के खाते में पहुंच जाता है। दोनों सिस्टम रिजर्व बैंक के प्लेटफॉर्म से चलते हैं और बड़े अमाउंट के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद माने जाते हैं।
सरकार ने यह कदम क्यों उठाया
वित्त विभाग का कहना है कि RBI के ई-कुबेर सिस्टम के जरिए जब राशि NEFT या RTGS से आती है तो वह सीधे और रियल टाइम आधार पर सरकारी खाते में दर्ज हो जाती है। पहले कई बार बड़ी रकम के ट्रांसफर में देरी होती थी या प्रक्रिया लंबी हो जाती थी। अब ऐसा नहीं होगा। पैसा तुरंत सरकार के खाते में दिखेगा, जिससे फंड की उपलब्धता साफ और स्पष्ट रहेगी।
क्या बदलेगा आम लोगों और विभागों के लिए
यह फैसला खास तौर पर उन मामलों पर लागू होगा, जहां एक करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सरकार को जमा करनी है। अब इतनी बड़ी रकम के लिए चेक या अन्य पारंपरिक तरीकों की जगह सीधे NEFT या RTGS का उपयोग करना होगा। इससे भुगतान प्रक्रिया तेज होगी, ट्रैकिंग आसान होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
सरकार को क्या फायदा
सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि राजस्व सीधे और तुरंत सरकारी खाते में पहुंचेगा। इससे कैश फ्लो बेहतर रहेगा और योजनाओं के लिए फंड की उपलब्धता समय पर होगी। सरकार का मानना है कि इससे विकास कार्यों में गति आएगी और वित्तीय प्रबंधन और मजबूत होगा।
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