Ranchi : रांची के हटिया रेलवे स्टेशन पर गुरुवार को कुछ देर के लिए ऐसा लगा जैसे बड़ा रेल हादसा हो गया हो। ट्रेन के एक डिब्बे से धुआं निकलता दिखा, सायरन बजने लगे और स्टेशन पर हलचल बढ़ गई। बाद में साफ हुआ कि यह आपदा से निपटने की तैयारी परखी जा रही थी। दरअसल, यहां मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया था। इस संयुक्त अभ्यास में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की टीमों ने मिलकर हिस्सा लिया।

अचानक आग का सीन, तुरंत एक्शन
ड्रिल के तहत एक ट्रेन के कोच में आग लगने की स्थिति बनाई गई। कुछ लोगों के अंदर फंसे होने का दृश्य भी तैयार किया गया। जैसे ही सूचना मिली, रेस्क्यू टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। धुएं से भरे डिब्बे में सुरक्षा उपकरण पहनकर जवान अंदर गए और आग पर काबू पाने की प्रक्रिया शुरू की। फायर एक्सटिंग्विशर और अन्य उपकरणों की मदद से आग बुझाने का अभ्यास किया गया। साथ ही यह भी दिखाया गया कि ऐसी स्थिति में यात्रियों को कैसे सुरक्षित बाहर निकाला जाए।
घायलों को निकालकर दिया प्राथमिक उपचार
NDRF के जवानों ने अंदर फंसे “घायलों” को स्ट्रेचर पर बाहर निकाला। बाहर पहले से मेडिकल टीम तैनात थी। प्राथमिक उपचार देने के बाद एंबुलेंस के जरिए अस्पताल भेजने की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया गया। पूरी कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की गई, ताकि असली हादसे की स्थिति में किसी तरह की घबराहट न हो।
भीड़ नियंत्रण और तालमेल की परीक्षा
RPF की टीम ने स्टेशन परिसर में भीड़ को संभालने और सुरक्षा घेरा बनाने की जिम्मेदारी निभाई। वायरलेस सेट के जरिए लगातार संपर्क बनाए रखा गया। अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय कैसे हो, इसे खास तौर पर परखा गया।

मकसद, हर हाल में तैयार रहना
अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की मॉक ड्रिल का उद्देश्य सिर्फ अभ्यास करना नहीं, बल्कि सिस्टम की तैयारियों को जांचना भी है। रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त स्थानों पर आपदा की स्थिति में समय पर और संगठित कार्रवाई बेहद जरूरी होती है।
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