New Delhi : आर्थिक सर्वेक्षण 2026 के अनुसार, भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है, लेकिन वर्ष 2025 में भारतीय रुपया अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सका। सर्वेक्षण में कहा गया है कि रुपये की मौजूदा कीमत देश की वास्तविक आर्थिक ताकत को पूरी तरह नहीं दर्शाती। हालांकि, सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि फिलहाल कमजोर रुपया नुकसानदायक नहीं माना जा रहा है, क्योंकि इससे भारतीय निर्यात पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ के असर को कुछ हद तक कम करने में मदद मिली है।
मजबूत अर्थव्यवस्था के बावजूद दबाव में रुपया
सर्वेक्षण के अनुसार, भारत की आर्थिक विकास दर ऊंची, महंगाई नियंत्रण में, बैंकिंग क्षेत्र मजबूत और कॉरपोरेट कंपनियों की वित्तीय स्थिति अच्छी बनी हुई है। इसके बावजूद रुपये पर दबाव देखा गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपया अपनी वास्तविक क्षमता से कमजोर है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहने के कारण आयातित महंगाई का खतरा फिलहाल कम है।
निवेशकों की सतर्कता बनी चिंता
सर्वेक्षण में चेतावनी दी गई है कि कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों को सतर्क कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में निवेश को लेकर कुछ हिचक देखी जा रही है और निवेशकों का भरोसा बनाए रखना आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती होगा।
व्यापार घाटा और विदेशी पूंजी पर निर्भरता
आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि भारत को वस्तुओं के व्यापार में घाटे का सामना करना पड़ता है। सेवाओं और विदेश से आने वाली राशि से होने वाला अधिशेष इस घाटे की पूरी भरपाई नहीं कर पाता। ऐसे में भुगतान संतुलन बनाए रखने के लिए देश को विदेशी पूंजी प्रवाह पर निर्भर रहना पड़ता है। विदेशी निवेश में कमी आने पर रुपये पर सीधा असर पड़ता है।
रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया
गुरुवार को भारतीय रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। विदेशी निवेश में लगातार गिरावट और कंपनियों द्वारा जोखिम से बचाव के उपायों के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा। रुपया 92 के अहम स्तर से नीचे चला गया।
गिरावट रोकने के लिए आरबीआई का हस्तक्षेप
बाजार सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये की तेज गिरावट को रोकने के लिए बाजार में दखल दिया। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि वह रुपये के किसी निश्चित स्तर को लक्ष्य नहीं करता, बल्कि अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करता है।
वैश्विक कारणों से बढ़ा दबाव
अमेरिकी टैरिफ, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की निकासी, सोने के आयात में बढ़ोतरी और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। यह स्थिति ऐसे समय में है जब भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है और हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता भी किया गया है।
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