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    Home»जोहार ब्रेकिंग»मराठी सीखेंगे, लेकिन समय दें, मुंबई के रिक्शा चालकों की डबल इंजन सरकार और झारखंड के प्रतिनिधियों से गुहार
    जोहार ब्रेकिंग

    मराठी सीखेंगे, लेकिन समय दें, मुंबई के रिक्शा चालकों की डबल इंजन सरकार और झारखंड के प्रतिनिधियों से गुहार

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkAugust 24, 2026No Comments5 Mins Read3
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    महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा के व्यावहारिक ज्ञान की जांच को लेकर विवाद बढ़ गया है. 24 अगस्त को मुंबई के कांदिवली इलाके में बड़ी संख्या में ऑटो चालकों ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया और तीन दिन की हड़ताल शुरू की. कांदिवली लिंक रोड पर ऑटो खड़े किए जाने से कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ.

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुंबई में रोजी-रोटी के लिए रिक्शा चलाने वाले झारखंड के प्रवासियों ने अब झारखंड सरकार और अपने सांसदों-विधायकों से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है. प्रवासी रिक्शा चालकों का कहना है कि वे मराठी सीखने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए. उनका आरोप है कि अचानक शुरू हुई जांच और कार्रवाई के माहौल से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.

    मराठी से कोई द्वेष नहीं, सीखने के लिए समय दें

    प्रदर्शन में शामिल झारखंडी रिक्शा चालकों ने कहा कि उनका मराठी भाषा या महाराष्ट्र के लोगों से कोई विरोध नहीं है. वे मराठी सीखना और बोलना चाहते हैं, लेकिन दो-तीन महीने में कोई व्यक्ति पूरी तरह नई भाषा नहीं सीख सकता. उनका कहना है कि वे धीरे-धीरे मराठी सीख रहे हैं और इसके लिए उन्हें कुछ और समय दिया जाना चाहिए.

    उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र उनके लिए कर्मभूमि है और वे मराठी भाषा व महाराष्ट्र का सम्मान करते हैं. उनका मराठी का बहिष्कार करने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने यहां तक कहा कि वे ‘जय मराठी, जय महाराष्ट्र’ बोलेंगे, लेकिन भाषा सीखने के लिए समय और सहयोग मिलना चाहिए.

    चुनाव में बुलाते हो, दुख में साथ क्यों नहीं

    प्रवासी झारखंडी रिक्शा चालकों ने झारखंड के सांसदों और विधायकों की चुप्पी पर भी नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि चुनाव के समय प्रवासी झारखंडियों को वोट के लिए याद किया जाता है और उन्हें अपने गांव आने के लिए बुलाया जाता है, लेकिन जब वे मुंबई में मुश्किल स्थिति से गुजर रहे हैं तो उनके प्रतिनिधि उनके साथ खड़े नहीं दिख रहे हैं.

    एक रिक्शा चालक ने कहा कि झारखंड के बहुत से लोग मुंबई में रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. ऐसे में अगर उनकी रोजी-रोटी पर संकट आता है तो झारखंड के जनप्रतिनिधियों को उनकी आवाज उठानी चाहिए.

    उन्होंने कहा, “जब हमारे दुख के समय आप हमारे साथ नहीं हैं तो हम आपके साथ क्यों रहें.” प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि वे अपनी लड़ाई खुद लड़ने को मजबूर हैं, लेकिन चाहते हैं कि झारखंड सरकार और राज्य के प्रतिनिधि इस मामले में उनकी मदद करें.

    डबल इंजन सरकार से उम्मीद

    प्रवासी रिक्शा चालकों ने केंद्र और महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार होने का हवाला देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में डबल इंजन की सरकार है. ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर उनकी समस्या का समाधान निकाला जाना चाहिए.

    उन्होंने झारखंड सरकार से भी मांग की कि वह महाराष्ट्र सरकार के समक्ष प्रवासी झारखंडियों की समस्या उठाए और यह सुनिश्चित करने की कोशिश करे कि भाषा सीखने के नाम पर किसी की रोजी-रोटी प्रभावित न हो.

    महाराष्ट्र में RTO की ओर से ऑटो और टैक्सी चालकों के मराठी ज्ञान की जांच की जा रही है. रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में अपेक्षित भाषा ज्ञान नहीं पाए जाने पर चालकों को नोटिस दिए जा रहे हैं और उन्हें भाषा सीखने के लिए समय दिया जा रहा है. आगे नियमों का पालन नहीं करने पर बैज निलंबित करने जैसी कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है.

    रतननगर में करीब 200, वसई में भी हड़ताल का दावा

    झारखंडी रिक्शा चालकों के अनुसार, रतननगर में करीब 200 चालक अपने वाहन खड़े कर हड़ताल में शामिल हुए. वहीं वसई में भी बड़ी संख्या में प्रवासी रिक्शा चालकों के हड़ताल पर रहने का दावा किया गया है. उनका कहना है कि यह विरोध फिलहाल एक दिन के लिए किया गया है और आगे की स्थिति सरकार व जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी.

    मुंबई में व्यापक स्तर पर ऑटो-टैक्सी चालकों के विरोध के कारण कई इलाकों में ऑटो की उपलब्धता प्रभावित हुई है. कांदिवली लिंक रोड पर प्रदर्शन के दौरान यातायात भी बाधित हुआ था.

    कार्रवाई नहीं हुई तो वोट बहिष्कार की चेतावनी

    प्रदर्शनकारी झारखंडी रिक्शा चालकों ने चेतावनी दी है कि अगर झारखंड सरकार और उनके सांसद-विधायक इस मामले में आवाज नहीं उठाते हैं, तो आने वाले चुनाव में वे वोट बहिष्कार पर विचार करेंगे.

    उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य महाराष्ट्र या मराठी भाषा का विरोध करना नहीं है. वे सम्मान के साथ मुंबई में काम करना चाहते हैं और मराठी सीखने के लिए तैयार हैं. उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि भाषा सीखने के लिए उन्हें पर्याप्त समय दिया जाए और इस दौरान उनकी रोजी-रोटी पर कोई संकट न आए.

    उनका कहना है कि वे महाराष्ट्र को अपनी कर्मभूमि मानते हैं, लेकिन झारखंड उनके लिए अपनी जन्मभूमि है. इसलिए मुश्किल की इस घड़ी में उन्हें अपने राज्य की सरकार और जनप्रतिनिधियों से साथ खड़े होने की उम्मीद है.

    Also Read : महाराष्ट्रः कैब चलाना है तो मराठी सीखना होगा, जानिये पूरा मामला

    महाराष्ट्र मुंबई रिक्शा चालक
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