Chaibasa : चाईबासा जिला कांग्रेस कमेटी में चल रहे अंदरूनी विवाद ने अब खुला रूप ले लिया है। नगर अध्यक्ष मो. सलीम के निलंबन के विरोध में चाईबासा नगर कांग्रेस कमेटी ने सामूहिक इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व को कड़ा संदेश दिया है। इस फैसले से कांग्रेस संगठन को बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर तब जब चुनावी सरगर्मी धीरे-धीरे बढ़ रही है।
उपाध्यक्ष, महासचिव और वार्ड अध्यक्षों ने छोड़ा साथ
नगर कमेटी के इस सामूहिक इस्तीफे में नगर उपाध्यक्ष, महासचिव, कई वार्ड अध्यक्षों समेत दर्जनों सक्रिय कार्यकर्ता शामिल हैं। सभी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इससे साफ है कि नाराजगी सिर्फ कुछ नेताओं तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी स्तर तक फैली हुई है।
कांग्रेस भवन में सौंपा गया इस्तीफा पत्र
रविवार को कांग्रेस भवन चाईबासा में इस्तीफे से जुड़ा पत्र जिला कांग्रेस अध्यक्ष रंजन बोइपाई के नाम सौंपा गया। यह पत्र कार्यालय सचिव सुशील दास को दिया गया। इस्तीफा देने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मौके पर ही अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।
“गलत फैसलों से कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा”
इस्तीफा देने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि नगर अध्यक्ष मो. सलीम को निलंबित करना और कार्यकर्ताओं की भावना के खिलाफ दूसरे व्यक्ति को प्रत्याशी घोषित करना पूरी तरह गलत फैसला है। उनका आरोप है कि पार्टी नेतृत्व ने न तो स्थानीय नेताओं से सलाह ली और न ही जमीनी कार्यकर्ताओं की राय को तवज्जो दी।
“मेहनत और निष्ठा का हुआ अपमान”
कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे लंबे समय से संगठन को मजबूत करने में लगे थे, लेकिन इस फैसले से उनकी मेहनत और निष्ठा का अपमान हुआ है। उनका कहना है कि जब कार्यकर्ताओं की आवाज ही नहीं सुनी जाएगी, तो संगठन में काम करने का कोई मतलब नहीं रह जाता।
“अब इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं रह सकते”
नगर कमेटी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि जब उनकी बातों और सुझावों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, तो वे इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं बने रह सकते। इसी कारण सभी ने एकमत होकर पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने का फैसला किया।
चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए चिंता बढ़ी
सामूहिक इस्तीफा जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय को सौंप दिया गया है। राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को आगामी चुनाव के लिहाज से कांग्रेस संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व इस नाराजगी को कैसे संभालता है और टूटे संगठन को फिर से जोड़ने की क्या कोशिश करता है।
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