जोहार लाइव ब्यूरो
एक तरफ पूरे देशभर में दुर्गा पूजा की तैयारी जोरों पर है. इस त्यौहारी मौसम में बाजार में रौनक लौटने का इंतजार सभी कर रहे हैं. बाजार को भी कोयला कर्मियों और कारोबारियों को कोल इंडिया के सालाना परफॉर्मेंस लिंक्ड रिवॉर्ड (PLR) का इंतजार है. पिछले एक दशक में यह बोनस करीब दोगुना हो चुका है. 2015-16 में जहां कोयला कर्मियों को 54,000 रुपये बोनस मिला था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 1.03 लाख रुपये हो गया. कोयला उत्पादक जिलों धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, चतरा, रांची सहित अन्य में त्योहारों के दौरान मिलने वाला यह बोनस अतिरिक्त खर्च का एक बड़ा जरिया बन गया है.
हालांकि, कोल इंडिया की ओर से इस साल बोनस बैठक को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की गई है. वहीं, ट्रेड यूनियन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बोनस को लेकर बैठक अक्टूबर के पहले सप्ताह में हो सकती है.
बोनस बना ‘पूजा इकोनॉमी’ का हिस्सा
कोयला कर्मियों के लिए सालाना बोनस सिर्फ अतिरिक्त आय नहीं है, बल्कि कोयला उत्पादक इलाकों के बाजारों के लिए भी इसका खास महत्व है. सेक्टर में हर साल औसतन करीब 1,500 करोड़ रुपये का बोनस बांटे जाने का अनुमान है. इसका बड़ा हिस्सा त्योहारी सीजन के दौरान स्थानीय बाजारों में पहुंचता है.
कर्मचारियों और ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों को उम्मीद है कि इस साल बोनस की राशि बढ़कर करीब 1.10 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. हालांकि, अंतिम राशि बोनस बैठक में तय होगी और फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है.
पिछले कई वर्षों में PLR में लगातार हुई बढ़ोतरी ने इसे दुर्गा पूजा के आसपास होने वाले घरेलू खर्च का एक अहम हिस्सा बना दिया है.
लंबे समय के आंकड़ों पर नजर डालें तो बोनस में बढ़ोतरी और साफ दिखाई देती है. 2015-16 में कोयला कर्मियों को 54,000 रुपये बोनस मिला था, जो 2025-26 में बढ़कर 1,03,000 रुपये हो गया. यानी 10 वर्षों में बोनस राशि में करीब 91 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.
फिलहाल कोल इंडिया और उसकी अनुषंगी कंपनियों में कुल 2,08,616 कर्मचारी हैं. इनमें 1,93,484 गैर-कार्यकारी (Non-Executive) कर्मचारी हैं. PLR का भुगतान गैर-कार्यकारी कर्मचारियों को किया जाता है. इसलिए कर्मचारियों की संख्या भी कुल बोनस भुगतान को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है.
पिछले 10 वर्षों में कोल इंडिया का बोनस

कोल इंडिया के कर्मचारियों के वितरण के लिहाज से झारखंड सबसे अहम राज्यों में है. राज्य में करीब 75,000 कर्मचारी हैं, जो कोल इंडिया के संचालन वाले राज्यों में सबसे अधिक संख्या बताई गई है.
झारखंड में BCCL, CCL और CMPDI के अलावा ECL के राजमहल, मुगमा और चितरा कोयला क्षेत्रों की भी महत्वपूर्ण मौजूदगी है. ऐसे में सालाना बोनस की बड़ी राशि झारखंड पहुंचने की उम्मीद है.
धनबाद और झारखंड के दूसरे कोयला बेल्ट के बाजारों के लिए यह बोनस अब त्योहारी अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ गया है. खासकर दुर्गा पूजा के आसपास के हफ्तों में बोनस की रकम बाजार में खरीदारी और कारोबार को बढ़ावा देने वाली अहम राशि बन जाती है.
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