बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोमवार को आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर सीधा हमला बोला. उन्होंने दावा किया कि नगीना में चंद्रशेखर को ईवीएम में धांधली कर चुनाव जिताया गया. चंद्रशेखर का क्षेत्र में कोई खास जनाधार नहीं था. लेकिन बीजेपी ने बसपा को नुकसान पहुंचाने के लिए धांधली कराई.
सोमवार को बसपा ऑफिस में पूर्व सीएम मायावती ने न्यूज एजेंसियों से बात की है. ईवीएम पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि बसपा शुरू से ही ईवीएम के इस्तेमाल का विरोध करती रही है. बैलेट पेपर से वोटिंग कराने के लिए पार्टी सुप्रीम कोर्ट गई थी.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विवाद पर बसपा प्रमुख ने कहा-
‘देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को लेकर लोगों के मन में किसी तरह का संदेह नहीं रहना चाहिए. वोटर जिसको वोट दे रहा, उस वोट की गिनती भी उसी के पक्ष में होना चाहिए न कि दूसरे में उसे गिना जाए.’
पढ़िए मायावती के प्रेस कांफ्रेंस की प्रमुख बातें…
1. वोटर ने जिसको वोट किया उसी के पक्ष में गिनती भी हो
मायावती ने कहा कि संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार दिया है. इसी अधिकार के जरिए जनता अपनी पसंद की सरकार चुनती है. संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. हर मतदाता को अपनी पसंद के उम्मीदवार या पार्टी को वोट देने की स्वतंत्रता होनी चाहिए और उसका वोट उसी के पक्ष में गिना जाना चाहिए, जिसके पक्ष में उसने मतदान किया है. मतदाता के मन में यह संदेह नहीं होना चाहिए कि उसका वोट किसी दूसरे के खाते में चला गया या उसकी गिनती किसी और के पक्ष में हुई.
2. ‘लोकतंत्र पर लोगों का भरोसा खत्म होगा’
मायावती ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर मतदाता के मन में संदेह पैदा होने से लोकतंत्र पर उसका भरोसा कमजोर होगा. चुनाव आयोग को ऐसी सभी भ्रांतियों को दूर करना चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास चुनाव प्रक्रिया में बना रहे.
देश में करीब पांच दशक तक बैलेट पेपर से चुनाव होते रहे. मतदान के बाद मतपत्रों को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खोला और गिना जाता था. बाद में ईवीएम के जरिए मतदान की व्यवस्था शुरू हुई. जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब भाजपा ने भी ईवीएम को लेकर सवाल उठाए थे.
भाजपा की ओर से तब कहा गया था कि ईवीएम एक मशीन है और इसमें लगी इलेक्ट्रॉनिक चिप को प्रभावित किया जा सकता है. पूर्व सीएम बोलीं- उस समय ईवीएम से संबंधित एक किताब भी प्रकाशित की गई थी और मशीन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए थे. सत्ता में आने के बाद भाजपा ने ईवीएम व्यवस्था को समाप्त करने के बजाय इसे जारी रखा.
3. ‘दलित-पिछड़ों के वोट प्रभावित होने की आशंका’
मायावती ने कहा कि बसपा देश के दबे-कुचले, दलित और अति पिछड़े वर्ग के लोगों के हितों के लिए बनी पार्टी है. ईवीएम के कारण इन वर्गों के वोटों को लेकर लोगों के मन में आशंका बनी हुई है. पार्टी समर्थकों के बीच ईवीएम को लेकर विश्वास की कमी से मतदान के प्रति रुझान भी प्रभावित हो रहा है.
4. चंद्रशेखर भाजपा के इशारे पर काम करते हैं
मायावती ने दावा किया कि चंद्रशेखर आजाद का नगीना में कोई खास जनाधार नहीं था, इसके बावजूद वे चुनाव जीत गए. उन्होंने आरोप लगाया कि ईवीएम में गड़बड़ी के जरिए उन्हें चुनाव जिताया गया. वह भाजपा के इशारे पर काम करते हैं. वह अधिकारियों से मिलने और धरना-प्रदर्शन करने पहुंच जाते हैं. युवाओं को गुमराह करते हैं. इसके बाद ये युवा कोर्ट-कचहरी के चक्कर में फंसकर अपना भविष्य बर्बाद करने को मजबूर हो जाते हैं.
5. VVPAT को लेकर भी सवाल उठाए
बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी ने ईवीएम की चुनाव प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इसके बाद ईवीएम के साथ VVPAT की व्यवस्था लागू की गई. हालांकि, उन्होंने कहा कि इससे भी उनकी आशंकाएं दूर नहीं हुई हैं. ईवीएम से मतों की गिनती के दौरान VVPAT की सभी पर्चियों की गिनती नहीं होती.
इससे मतदाता को यह पूरी तरह विश्वास दिलाना संभव नहीं है कि उसका वोट उसी उम्मीदवार या पार्टी के खाते में गया है, जिसके पक्ष में उसने मतदान किया था. किसी भी इलेक्ट्रॉनिक मशीन को लेकर आशंका पैदा हो सकती है. इसलिए चुनाव आयोग को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे मतदाता को अपने वोट की शुचिता और सही गिनती को लेकर पूरा भरोसा हो.
VVPAT क्या है?
VVPAT यानी Voter Verifiable Paper Audit Trail एक ऐसी व्यवस्था है, जो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के जरिए डाले गए वोट की पुष्टि करने में मदद करती है. जब मतदाता EVM पर अपना वोट डालता है, तो VVPAT मशीन में एक कागजी पर्ची दिखाई देती है. इस पर्ची पर मतदाता द्वारा चुने गए उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिन्ह दर्ज होता है. पर्ची कुछ सेकंड तक पारदर्शी स्क्रीन के पीछे दिखाई देने के बाद मशीन के अंदर सुरक्षित रूप से जमा हो जाती है.
VVPAT का उद्देश्य मतदाता को यह देखने का अवसर देना है कि उसका वोट उसी उम्मीदवार के पक्ष में दर्ज हुआ है, जिसे उसने चुना था. जरूरत पड़ने पर इन पर्चियों का इस्तेमाल वोटों के सत्यापन और चुनावी ऑडिट में किया जा सकता है.
6. ‘विपक्ष में गुस्सा है, ऐसी स्थिति नहीं आनी चाहिए’
मायावती ने कहा कि चुनाव से जुड़े कई मुद्दों को लेकर लोगों के बीच भ्रांतियां बनी हुई हैं. इन्हें दूर करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है. विपक्ष में भी इसे लेकर नाराजगी है और ऐसी स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए.
बसपा प्रमुख ने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग उनकी बातों पर गंभीरता से विचार करेगा और ऐसी व्यवस्था करेगा, जिससे देश में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव को लेकर सभी लोगों का विश्वास कायम रह सके.
7. नगीना में 1.5 लाख से ज्यादा वोट से जीते थे चंद्रशेखर
2024 के लोकसभा चुनाव में चंद्रशेखर आजाद ने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के टिकट पर नगीना सीट से चुनाव लड़ा था. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, उन्हें 5,12,552 वोट मिले थे. उन्होंने भाजपा के ओम कुमार को 1,51,473 वोटों के अंतर से हराया था. चंद्रशेखर को 51.19% वोट मिले थे.
इस चुनाव में सपा के मनोज कुमार को 1,02,374 वोट मिले थे, जबकि बसपा के सुरेंद्र पाल सिंह को 13,272 वोट मिले थे. चंद्रशेखर की जीत के बाद उनका राजनीतिक कद बढ़ा और वे लोकसभा पहुंचे.

