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    Home»क्राइम»CID रिपोर्ट का खुलासा : TDPL पर JPSC का नियंत्रण नहीं, कर्मी घर ले जाते थे उत्तर पुस्तिकाएं
    क्राइम

    CID रिपोर्ट का खुलासा : TDPL पर JPSC का नियंत्रण नहीं, कर्मी घर ले जाते थे उत्तर पुस्तिकाएं

    Joharlive NetworkBy Joharlive NetworkJuly 29, 2026No Comments3 Mins Read5
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    किसलय शानू: रांची

    जेपीएससी (JPSC) परीक्षा संचालित करने वाली कंपनी टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) पर जेपीएससी का कोई नियंत्रण नहीं था. इस बात का खुलासा जेपीएससी घोटाले को लेकर तैयार सीआईडी ने अपनी आरंभिक जांच रिपोर्ट में किया है.

    सीआईडी की रिपोर्ट के अनुसार, टीडीपीएल कंपनी को परीक्षा संचालन के संबंध में प्रारंभ से लेकर अंत तक सभी प्रक्रियाओं के लिए काम का जिम्मा एंड-टू-एंड बेसिस पर दिया गया था. इस तरह उक्त एजेंसी के कार्यों पर कोई चेक एंड बैलेंस मैकेनिज्म नहीं रहा. इसलिए यह मामला गंभीर जांच का विषय है.

    एसीबी को मामले में मिली शिकायत के अनुसार, कंपनी के द्वारा ही वन टाइम रजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन एप्लिकेशन फॉर्म प्रोसेस, एडमिट कार्ड जेनरेशन, प्रश्न पत्र प्रिंटिंग, ओएमआर शीट एवं उत्तर पुस्तिका प्रिंटिंग, ओएमआर स्कैनिंग, ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग और रिजल्ट प्रकाशन की जिम्मेदारी दी गई थी.

    सीआईडी को मिली शिकायत में इस बात का भी उल्लेख है कि झारखंड लोक सेवा आयोग के इतिहास में पहली बार किसी एक एजेंसी को ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग से लेकर अंतिम परिणाम घोषित करने तक का पूरा काम सौंपा गया था.

    पूर्व में परीक्षा की पारदर्शिता और गोपनीयता बनाए रखने के लिए प्री-प्रोसेसिंग, पोस्ट-प्रोसेसिंग तथा गोपनीय प्रिंटिंग जैसे कार्य अलग-अलग एजेंसियों को दिए जाते थे.

    कंपनी के आवासीय परिसर में मिली परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं

    सीआईडी ने टीडीपीएल एजेंसी के आवासीय परिसर में छापेमारी के बाद तैयार अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि परिसर की छानबीन के क्रम में चार कंप्यूटर मिले थे. एक कंप्यूटर सेट में फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर मेंस-2026 परीक्षा के परीक्षार्थियों की लिखित उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध पाई गईं. इसके संबंध में कमरे में उपस्थित टीडीपीएल के कर्मी प्रदीप कुमार सिंह से पूछताछ की गई. पूछताछ में उन्होंने बताया कि कंपनी के स्टाफ मो. उस्मान और अवध द्वारा इसे लाया गया था.

    इस संबंध में जेपीएससी में उप परीक्षा नियंत्रक के पद पर पदस्थापित रहीं श्वेता कुमारी गुप्ता से भी सीआईडी ने पूछताछ की. उन्होंने बताया कि परीक्षा से संबंधित कोई भी दस्तावेज कार्यालय से बाहर भेजने की अनुमति नहीं थी. ऐसे में कंपनी द्वारा किस उद्देश्य से यह डाटा अपने आवासीय परिसर में रखा जाता था, इसके बारे में मुझे अधिक जानकारी नहीं है.

    सीआईडी ने अपनी रिपोर्ट में इस बयान और जांच में आए तथ्यों के आधार पर लिखा है कि यह नियमों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन है. सीआईडी को मिली शिकायत के अनुसार, पूर्व में लिखित परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के माध्यम से कराया जाता था. लेकिन वर्तमान में कथित डेटाबेस में छेड़छाड़ करके कुछ परीक्षार्थियों के अंक घटाने और बढ़ाने का काम किया जा सकता है. सीआईडी इस बिंदु पर भी गहन जांच कर रही है.

    शिकायत के अनुसार, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा द्वारा उक्त एजेंसी के आचरण और कार्यप्रणाली के बारे में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष को अवगत कराया गया था. इसके बाद उनसे परीक्षा संबंधी कार्य वापस लेकर उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को सौंप दिया गया था. बाद में परीक्षा नियंत्रक लोकेश मिश्रा को भी आरोप लगाकर कार्यमुक्त कर दिया गया था.

    Also Read : जेपीएससी घोटाला: पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को 28 जुलाई को पूछताछ के लिए सीआईडी का समन

    14वीं जेपीएससी परीक्षा JPSC scam
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