किसलय शानू: रांची
जेपीएससी परीक्षा घोटाला केस में गिरफ्तार श्वेता गुप्ता की जेपीएससी में इतनी पहुंच थी कि वह उप परीक्षा नियंत्रक के पद से ट्रांसफर होने के बाद भी वहां परीक्षा नियंत्रक का काम करती थी. इस बात का खुलासा सीआइडी की जांच रिपोर्ट से हुआ है.
सीआइडी की रिपोर्ट के अनुसार, श्वेता कुमारी गुप्ता का जेपीएससी से उप परीक्षा नियंत्रक के पद से कुछ माह पहले ही ट्रांसफर हो गया था. लेकिन इसके बावजूद उनके द्वारा परीक्षा नियंत्रक का काम किया जाता था. सीआइडी की जांच के क्रम में इस बात की जानकारी मिली है कि श्वेता कुमारी गुप्ता को जेपीएससी के कर्मी मनोज तिर्की और सोनू कुमार सहयोग करते थे.
उल्लेखनीय है कि इस केस में सीआइडी अब तक जांच के क्रम में कुल 10 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इसमें श्वेता कुमारी गुप्ता और सोनू कुमार भी शामिल हैं.
अभय तिवारी के बारे में सीआइडी ने श्वेता से की पूछताछ
श्वेता गुप्ता से सीआइडी ने पूछताछ के क्रम में केस के कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी के संबंध में भी सवाल किए. श्वेता कुमारी गुप्ता से सीआइडी ने पूछा कि अभय तिवारी के जेपीएससी में कार्यरत एजेंसी से जुड़े होने के बावजूद क्या कभी टीडीपीएल कंपनी या अभय कुमार द्वारा इसकी सूचना जेपीएससी को दी गई थी. इस सवाल के जवाब में श्वेता कुमारी गुप्ता ने कहा कि ऐसी कोई सूचना टीडीपीएल कंपनी द्वारा जेपीएससी को नहीं दी गई थी.
पूर्व नियोजित था षड्यंत्र
सीआइडी ने जांच रिपोर्ट में लिखा है कि जांच के क्रम में पता चला कि सौरव सुमन नामक एक परीक्षार्थी, जिसने जेपीएससी सिविल सेवा पीटी परीक्षा में भाग लिया था, उसकी ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी वायरल हुई थी. इस ओएमआर शीट में सौरव सुमन द्वारा कम प्रश्न हल किए गए थे. लेकिन इसके बावजूद वह परीक्षा में सफल घोषित किया गया था. इसलिए यह पूरा मामला संदेहास्पद प्रतीत होता है और पूर्व नियोजित षड्यंत्र का हिस्सा लगता है.
इसलिए पूरे मामले में सीआइडी गहन तरीके से अनुसंधान कर रही है.
क्या है पूरा मामला
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के बाद एक अभ्यर्थी की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी वायरल होने से पूरे मामले का खुलासा हुआ. आरोप है कि कम प्रश्न हल करने के बावजूद संबंधित अभ्यर्थी को सफल घोषित किया गया. इसके बाद परीक्षा में गड़बड़ी और परिणाम में हेरफेर के आरोपों की जांच सीआईडी को सौंपी गई.
जांच के दौरान सीआईडी ने पाया कि परीक्षा संचालन से जुड़े कई स्तरों पर अनियमितताएं हुईं. अब तक की कार्रवाई में सीआईडी आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. इनमें उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता के अलावा जेपीएससी की परीक्षाएं संचालित करने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, निदेशक रामवीर सिंह, एजेंसी के अन्य कर्मी उस्मान, एबाद, हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार शामिल हैं.
सीआईडी ने जांच के दौरान सैकड़ों डिजिटल उपकरण भी जब्त किए हैं. इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा, ताकि डेटा रिकवर कर डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा सकें. एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद यह भी जांच की जाएगी कि कहीं छापेमारी से पहले किसी डिजिटल साक्ष्य को नष्ट करने या उसके साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास तो नहीं किया गया.
इसी क्रम में सीआईडी ने जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते के कांके रोड स्थित सरकारी आवास की भी तलाशी ली थी. वहां से कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए, जिनके आधार पर आगे की जांच जारी है.
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