छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित बैलाडीला का नंदराज पहाड़ (Deposit-13) एक बार फिर बड़े पैमाने पर खनन को लेकर सवालों के घेरे में है. आदिवासी समुदायों के लिए यह पहाड़ सिर्फ एक खनिज स्रोत नहीं, बल्कि उनकी आस्था, संस्कृति और पारंपरिक पहचान का सर्वोच्च केंद्र है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस पहाड़ पर आदिवासियों के प्रमुख देव ‘नंदराज’ और ‘पिथोरमेटा’ का वास है. पीढ़ियों से इस क्षेत्र के आदिवासी समुदाय इस पवित्र देव स्थल को अपनी आजीविका और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सहेजते आए हैं.
लेकिन इस गहरी आस्था के केंद्र पर मंडराते संकट को लेकर विष्णु देव साय सरकार की भूमिका अब गंभीर संदेह के दायरे में है. सवाल यह है कि आदिवासियों के इस पवित्र देव स्थल को उजाड़ने और यहाँ विनाश का रास्ता साफ करने की जिद सरकार क्यों दिखा रही है?
साल 2019 के भारी विरोध के बाद प्रशासन ने जिस ग्रामसभा को शून्य करार दिया था और वन मंजूरी रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की थी, उसी परियोजना के तहत 2026 में खनन गतिविधियां शुरू होने का दावा किया जा रहा है.
उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों और एनएमडीसी के कॉरपोरेट रिकॉर्ड का मिलान करने पर एक बड़ा सवाल खड़ा होता है, जिस ग्रामसभा को दंतेवाड़ा कलेक्टर ने 2020 में गैर-कानूनी माना था, छह साल बाद वही परियोजना बिना किसी स्पष्ट सार्वजनिक खुलासे के आदिवासियों के इस देव स्थल को उजाड़ने की दिशा में कैसे आगे बढ़ गई?
2014 की ग्रामसभा पर उठे सवाल और कलेक्टर की जांच
Deposit-13 परियोजना के लिए 4 जुलाई 2014 को हिरोली ग्रामसभा में सहमति का रिकॉर्ड तैयार किया गया था. लेकिन 2019 में स्थानीय आदिवासियों ने इसका कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया कि ऐसी कोई ग्रामसभा हुई ही नहीं थी और दस्तावेजों में फर्जी हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान इस्तेमाल किए गए थे.
दंतेवाड़ा प्रशासन ने इस शिकायत की जांच की. 5 मार्च 2020 के कलेक्टर के ज्ञापन के आधार पर छत्तीसगढ़ वन विभाग ने 6 मार्च 2020 को एनएमडीसी को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया. इस नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया कि 4 जुलाई 2014 की हिरोली ग्रामसभा छत्तीसगढ़ अनुसूचित क्षेत्र की ग्राम सभा नियम, 1998 के नियमों के विपरीत थी.
इस ग्रामसभा को शुरुआत से ही शून्य माना गया. इसी आधार पर 11 जुलाई 2014 को जारी कलेक्टर के प्रमाणपत्र और 15 फरवरी 2017 की स्टेज-टू वन स्वीकृति को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई.
2022 तक लटका रहा मामला, फिर चली नई प्रक्रिया
कारण बताओ नोटिस के बाद मामला ठंडे बस्ते में नहीं गया था. एनएमडीसी के रिकॉर्ड के मुताबिक, 2022 में कंपनी ने खुद छत्तीसगढ़ वन विभाग को पत्र लिखकर स्टेज-टू वन मंजूरी रद्द करने के मामले में अंतिम निर्णय देने का अनुरोध किया था, ताकि खनन और लीज रिवाइवल की प्रक्रिया आगे बढ़ सके.
इसके बाद, 2024 से प्रशासनिक स्तर पर नई प्रक्रियाएं शुरू हुईं. 2 फरवरी 2024 को फॉरेस्ट डायवर्जन का नया प्रस्ताव एमओईएफसीसी के परिवेश पोर्टल पर ऑनलाइन भेजा गया. 16 अप्रैल 2025 को वन सलाहकार समिति की बैठक में इस प्रस्ताव पर विचार हुआ. वहीं, देहरादून के आईसीएफआरई ने 20 दिसंबर 2024 को ट्री फर्न आवास से सुरक्षित दूरी को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपी.
2026 में टर्नअराउंड: मंजूरी का ट्रांसफर और खनन शुरू
साल 2026 इस परियोजना के लिए निर्णायक मोड़ साबित हुआ. एनएमडीसी के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 2 जून 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने Deposit-13 की फॉरेस्ट क्लीयरेंस को एनएमडीसी-सीएमडीसी के नाम ट्रांसफर कर दिया.
इसके बाद 13 जुलाई 2026 को संशोधित प्रतिपूरक वनीकरण के लिए मंत्रालय ने सहमति दी और 15 जुलाई 2026 को राज्य वन विभाग ने फॉरेस्ट लैंड डायवर्जन ऑर्डर जारी कर दिया. एनएमडीसी की रिपोर्ट के अनुसार, 23 जुलाई 2026 से परियोजना क्षेत्र में शुरुआती खनन गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं.
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और अनुत्तरित सवाल यह है कि 2020 में जिस पूरी प्रक्रिया को प्रशासन ने गैर-कानूनी और शून्य घोषित किया था, उसका अंत किस आदेश से हुआ?
रिकॉर्ड और पारदर्शिता के लिहाज से सरकार और संबंधित विभागों के सामने निम्नलिखित गंभीर सवाल खड़े होते हैं:
- 6 मार्च 2020 को जारी कारण बताओ नोटिस का अंतिम निपटारा किस शासकीय आदेश के तहत हुआ? क्या 15 फरवरी 2017 की स्टेज-टू वन मंजूरी कभी औपचारिक रूप से रद्द हुई थी या नहीं?
- यदि पुरानी मंजूरी कायम रही, तो कलेक्टर द्वारा 2014 की ग्रामसभा को शून्य घोषित किए जाने के निष्कर्षों को कानूनी रूप से कैसे दरकिनार किया गया?
- 2026 में फॉरेस्ट क्लीयरेंस ट्रांसफर करने और डायवर्जन आदेश जारी करने से पहले क्या कोई नई वैध ग्रामसभा कराई गई? यदि हाँ, तो उसकी तारीख, कार्यवाही और प्रस्ताव का विवरण क्या है?
- इस पूरे डायवर्जन में स्थानीय आदिवासियों के सामुदायिक और व्यक्तिगत वन अधिकारों की वर्तमान स्थिति क्या है?
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