विजय उराँव
झारखंड की अर्थव्यवस्था में एक तरफ प्रति व्यक्ति आय लगातार बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ राज्य पर बकाया देनदारियां (Outstanding Liabilities) भी बड़ी हैं. वित्त वर्ष 2026-27 में राज्य की प्रति व्यक्ति आय मौजूदा कीमतों पर 1,35,195 रुपये पहुंचने का अनुमान है.
वहीं, इसी अवधि के अंत तक झारखंड की कुल बकाया देनदारियां करीब 1.61 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. यह आंकड़ा 2026-27 के अनुमानित GSDP 6,24,868 करोड़ रुपये का 25.8 फीसदी है.
साल 2026 की अनुमानित 4.0958 करोड़ आबादी को आधार मानें, तो 1.61 लाख करोड़ रुपये को आबादी से भाग देने पर करीब 39 हजार रुपये प्रति व्यक्ति का औसत निकलता है.
तीन साल में करीब 18 हजार रुपये बढ़ी प्रति व्यक्ति आय
बजट और आर्थिक आंकड़ों के मुताबिक झारखंड की प्रति व्यक्ति आय में लगातार बढ़ोतरी का अनुमान है. वित्त वर्ष 2024-25 में मौजूदा कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय 1,16,663 रुपये थी. 2025-26 में यह बढ़कर 1,25,677 रुपये रहने का अनुमान है. अब 2026-27 में इसके 1,35,195 रुपये रहने का अनुमान है. यानी दो साल में प्रति व्यक्ति आय में करीब 18,500 रुपये की बढ़ोतरी का अनुमान है.
महंगाई का असर हटाकर स्थिर कीमतों पर भी प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है. वर्ष 2024-25 में यह 68,357 रुपये थी, जबकि 2026-27 में इसके 75,670 रुपये रहने का अनुमान है.
यहां यह समझना जरूरी है कि प्रति व्यक्ति आय का मतलब हर व्यक्ति की जेब में इतनी रकम आना नहीं है. यह राज्य की कुल आर्थिक गतिविधि को आबादी के आधार पर औसत रूप में दिखाने वाला आंकड़ा है.

1.61 लाख करोड़ की बकाया देनदारी, खनिज राजस्व पर भी दबाव
2026-27 के अंत तक झारखंड की बकाया देनदारियां GSDP का 25.8 फीसदी यानी करीब 1.61 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. 6,24,868 करोड़ रुपये के GSDP का 25.8 फीसदी करीब 1,61,216 करोड़ रुपये बैठता है. इसी राशि को 2026 की अनुमानित 4.0958 करोड़ आबादी से भाग देने पर करीब 39 हजार रुपये प्रति व्यक्ति का औसत निकलता है.
यह सरकार की ओर से जारी “प्रति व्यक्ति कर्ज” का आंकड़ा नहीं, बल्कि बकाया देनदारियों और अनुमानित आबादी के आधार पर की गई गणना है.
कर्ज का अनुपात हालांकि कोविड काल के मुकाबले काफी नीचे आया है. साल 2020-21 में राज्य की बकाया देनदारियां GSDP के 36.8 फीसदी के बराबर थीं, जो 2024-25 में घटकर 25.3 फीसदी रह गईं. इसके बाद 2025-26 में यह 25.7 फीसदी और 2026-27 में 25.8 फीसदी रहने का अनुमान है. मध्यम अवधि के अनुमान में 2028-29 तक इसके 27.1 फीसदी पहुंचने की बात कही गई है.
इसी बीच 2026-27 में कर्ज की अदायगी को छोड़कर राज्य का कुल खर्च 1,50,106 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. कर्ज की अदायगी समेत कुल खर्च 1,58,560 करोड़ रुपये है. वहीं, उधारी को छोड़कर कुल प्राप्तियां 1,36,510 करोड़ रुपये हैं. राजकोषीय घाटा 13,596 करोड़ रुपये यानी GSDP का 2.2 फीसदी रहने का अनुमान है. राज्य की कुल उधारी 22,050 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें 8,454 करोड़ रुपये पुराने कर्ज की अदायगी के लिए निर्धारित हैं.
राज्य के अपने कर राजस्व से 45,999 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है. इसमें एसजीएसटी से 14,564 करोड़ रुपये की प्राप्ति शामिल है. वहीं, बजट में खनिज-युक्त भूमि उपकर की एक कर मद के तहत करीब 11 हजार करोड़ रुपये का अनुमान रखा गया है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान में करीब 9,900 करोड़ रुपये था.
खनिज राजस्व को लेकर केंद्र और राज्य के बीच चल रहा विवाद इसी वजह से महत्वपूर्ण हो जाता है. राज्य सरकार का दावा है कि नए एमएमडीआर संशोधन से उसे करीब 14 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है. सरकार इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है और राज्यों को खनिज पर सेस लगाने का अधिकार वापस देने की मांग उठा रही है.
करीब 14 हजार करोड़ रुपये का संभावित राजस्व नुकसान 2026-27 के अनुमानित 13,596 करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे के लगभग बराबर है. हालांकि दोनों अलग-अलग वित्तीय मद हैं, इसलिए इसे सीधे घाटे की भरपाई से जोड़ना सही नहीं होगा.
वहीं, 2026-27 में राज्य को 15,358 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष रहने का अनुमान है. यानी नियमित आय और नियमित खर्च के स्तर पर सरकार के पास अधिशेष रहने का अनुमान है, लेकिन कुल खर्च और प्राप्तियों को देखने पर राजकोषीय घाटा बना हुआ है.
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