Washington/Tehran : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान के साथ सीजफायर (युद्धविराम) का ऐलान कर दिया। करीब 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद दोनों देशों ने युद्ध रोकने पर सहमति जताई है। इस फैसले को मध्य पूर्व में शांति की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने समय सीमा से पहले सीजफायर स्वीकार नहीं किया होता, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट और अन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बना सकता था।
ट्रंप ने ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव को बताया व्यावहारिक
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की ओर से पेश किए गए 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को “व्यावहारिक” करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब ईरान के पावर प्लांट, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों पर हमले से बचने की कोशिश करेगा। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच 10 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसमें आगे की शांति प्रक्रिया और समझौते पर चर्चा होगी।
सीजफायर के बावजूद क्षेत्र में तनाव बरकरार
हालांकि सीजफायर की घोषणा के बाद भी जमीनी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। खबरों के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में अब भी अनिश्चितता बनी हुई है और हमलों की आशंका को देखते हुए अलर्ट जारी किए गए हैं। व्हाइट हाउस की ओर से युद्धविराम की पुष्टि के बावजूद इज़रायली सेना द्वारा ईरान पर हमले जारी रखने की बात सामने आई है। इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
ट्रंप बोले- ईरान पर हमला रोक रहा हूं
सीजफायर की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “मैं आज रात ईरान पर भेजे जा रहे विनाशकारी बल को रोक रहा हूं। अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत होता है तो मैं दो सप्ताह के लिए ईरान पर बमबारी और हमले को निलंबित करने पर सहमत हूं।”
ईरान ने भी दी प्रतिक्रिया, कहा- हमले रुके तो कार्रवाई बंद करेंगे
ईरान ने बयान जारी कर कहा कि अगर उसके खिलाफ हमले बंद कर दिए जाते हैं तो उसकी सशस्त्र सेनाएं भी अपने रक्षात्मक अभियान रोक देंगी। ईरान ने यह भी कहा कि वह अमेरिका की ओर से दिए गए 15 सूत्रीय प्रस्ताव पर आधारित बातचीत के अनुरोध पर विचार कर रहा है। साथ ही अमेरिका द्वारा ईरान की 10 सूत्रीय योजना को बातचीत का आधार मानने को भी सकारात्मक संकेत बताया गया।
होर्मुज स्ट्रेट पर दो सप्ताह की सहमति
ईरान ने कहा कि अगले दो सप्ताह तक होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का सुरक्षित आवागमन संभव होगा। हालांकि ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीकी सीमाओं और सुरक्षा व्यवस्था के अनुसार ही यह संचालन किया जाएगा।
ईरान ने इसे जीत बताया, अमेरिका ने अलग दावा किया
ईरान ने इस सीजफायर को अपनी “कूटनीतिक जीत” बताया। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की शर्तें मानते हुए शत्रुता समाप्त करने पर सहमति दी है। वहीं व्हाइट हाउस का कहना है कि असल में ट्रंप और अमेरिकी सेना के दबाव के कारण ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर मजबूर होना पड़ा।
इज़राइल के रुख पर अभी भी संशय
व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने दावा किया है कि इज़राइल ईरान के खिलाफ बमबारी रोकने पर सहमत हो गया है। लेकिन इज़रायली सैन्य अधिकारियों ने कहा कि हमले अब भी जारी हैं। तेल अवीव की ओर से औपचारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
खाड़ी देशों में मिसाइल अलर्ट जारी
सीजफायर की घोषणा के बाद भी सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत समेत खाड़ी देशों में मिसाइल अलर्ट जारी कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां संभावित हमलों को लेकर सतर्क हैं।
ईरान की दीर्घकालिक योजना में टैक्स लगाने का प्रस्ताव
खबरों के मुताबिक ईरान की दीर्घकालिक शांति योजना में ओमान के साथ समन्वय कर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव शामिल है। ईरान का कहना है कि इस टैक्स से मिलने वाला राजस्व युद्ध के बाद पुनर्निर्माण कार्यों में लगाया जाएगा।
इसके अलावा ईरान की प्रमुख शर्तों में शामिल हैं—
- क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी
- ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध हटाना
- जब्त की गई ईरानी संपत्तियों को वापस करना
पाकिस्तान की भूमिका, इस्लामाबाद में होगी बैठक
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि युद्धविराम प्रक्रिया में इज़राइल और हिजबुल्लाह के बीच लेबनान में संघर्ष रोकने की मांग भी शामिल है। उन्होंने अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों को शुक्रवार को इस्लामाबाद में मिलने का निमंत्रण दिया है। शरीफ ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में स्थायी शांति के लिए और सकारात्मक खबरें सामने आएंगी।
अब दुनिया की नजर 10 अप्रैल की बैठक पर
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर लागू होने के बाद अब पूरी दुनिया की नजर 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली बैठक पर है। माना जा रहा है कि यह बैठक युद्ध के स्थायी समाधान और मध्य पूर्व में शांति की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है। हालांकि क्षेत्र में इज़राइल की सैन्य गतिविधियां और खाड़ी देशों में बढ़ी सुरक्षा व्यवस्था यह संकेत देती है कि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।
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