पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक भूचाल आ गया है. लंबे समय तक सक्रिय रहे तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी की सांसे रविवार को थम गई. उनका शव बीरभूम के रामपुरहाट स्थित टीएमसी के पार्टी कार्यालय में मिला.
पुलिस के मुताबिक, शव फंदे से लटका हुआ मिला. मामले की जांच शुरू कर दी गई है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. मौके से एक कथित सुसाइड नोट मिलने की भी बात सामने आई है, हालांकि उसकी सामग्री और प्रामाणिकता की जांच की जा रही है.
यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आशीष बनर्जी की मौत ऐसे समय हुई है, जब उनकी करीब 25 साल लंबी चुनावी राजनीति को हाल ही में बड़ा झटका लगा था. साल 2001 से रामपुरहाट विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे बनर्जी को 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के ध्रुबा साहा ने हरा दिया था.
प्रोफेसर से शुरू हुआ था सफर
दिन 3 नवंबर 1951 को बीरभूम के रामपुरहाट में जन्मे आशीष बनर्जी का शुरुआती जीवन शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा रहा. उन्होंने बर्दवान विश्वविद्यालय से बंगाली में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की और 1985 में पीएचडी पूरी की. विश्वविद्यालय के दौरान वे छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे और यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स काउंसिल के महासचिव रहे. बाद में वे रामपुरहाट कॉलेज में बंगाली के एसोसिएट प्रोफेसर रहे.
यानी जिस व्यक्ति ने अपने करियर की शुरुआत कक्षा में शिक्षक के तौर पर की थी, वही आगे चलकर बंगाल की विधानसभा में मंत्री और उपाध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचा.
2001 में शुरू हुई 25 साल की सियासी पारी
आशीष बनर्जी ने 2001 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर रामपुरहाट विधानसभा सीट से चुनाव जीता. इसके बाद 2006, 2011, 2016 और 2021 में भी वे इसी सीट से विधायक चुने गए. इस तरह 2026 तक वे पांच बार रामपुरहाट के विधायक रहे.

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें कई अहम जिम्मेदारियां मिलीं। 2014 में वे AYUSH विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बने. इसके बाद उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी, सांख्यिकी और प्रोग्राम मॉनिटरिंग जैसे विभाग संभाले. साल 2017 से 2021 तक वे पश्चिम बंगाल के कृषि मंत्री रहे.
साल 2021 में पांचवीं बार विधायक बनने के बाद उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा का उपाध्यक्ष बनाया गया. वे जुलाई 2021 से मई 2026 तक इस पद पर रहे.
लेकिन 2026 का विधानसभा चुनाव उनके लिए अलग रहा. करीब ढाई दशक से जिस रामपुरहाट सीट पर उनका दबदबा था, वहां बीजेपी के ध्रुबा साहा ने उन्हें हरा दिया. ध्रुबा साहा को 1,11,920 वोट मिले, जबकि आशीष बनर्जी को 87,687 वोट मिले. यानी वे करीब 24,233 वोटों से चुनाव हार गए.
चुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर उनकी भूमिका भी बदली. रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने टीएमसी की बीरभूम जिला कोर कमेटी के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता नहीं छोड़ी थी.

परिवार और निजी जीवन
चुनावी हलफनामे के मुताबिक आशीष बनर्जी के पिता का नाम दिवंगत असित बरन बनर्जी था. उनकी पत्नी सुस्मित बनर्जी हैं, जिनका पेशा गृहिणी दर्ज है. सार्वजनिक रिकॉर्ड में उनके बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों से जुड़ी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है.
साल 2026 के चुनावी हलफनामे में उन्होंने करीब 2.47 करोड़ की संपत्ति घोषित की थी और उनके ऊपर कोई देनदारी दर्ज नहीं थी. हलफनामे में उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला भी घोषित नहीं किया गया था. उनकी आय के स्रोतों में पेंशन और विधानसभा उपाध्यक्ष के मानदेय का उल्लेख था.
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