Ranchi : रांची स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) को शुक्रवार को नया नेतृत्व मिल गया। प्रोफेसर डॉ. राजीव मनोहर ने विश्वविद्यालय के नए कुलपति के रूप में पदभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने विश्वविद्यालय में लंबे समय से चल रहे गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर सकारात्मक संकेत दिए, जिससे कर्मचारियों के बीच समाधान की उम्मीद जगी है।
कुल सचिव ने किया स्वागत
पदभार ग्रहण के मौके पर विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. धनंजय द्विवेदी मौजूद रहे। उन्होंने नए कुलपति को बुके देकर स्वागत किया और विश्वविद्यालय परिवार की ओर से शुभकामनाएं दीं। इस दौरान विश्वविद्यालय के कई अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे। गौरतलब है कि पिछले करीब 25 दिनों से विश्वविद्यालय के गैर-शैक्षणिक कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि एमएसीपी समेत कई लंबित मांगों पर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
आंदोलनरत कर्मचारियों से मिले नए वीसी
पदभार संभालने के तुरंत बाद नए कुलपति प्रो. राजीव मनोहर आंदोलन कर रहे कर्मचारियों के बीच पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कर्मचारियों से बातचीत करते हुए कहा कि उनकी परेशानियों को समझा जा रहा है और इसका समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे पर लोक भवन और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी और नियमों के अनुसार जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
विश्वविद्यालय में बेहतर माहौल बनाना प्राथमिकता
नए कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिवार के सभी लोग मिलकर ही संस्थान को आगे बढ़ा सकते हैं, इसलिए कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान भी जरूरी है।
रिसर्च और रोजगार पर रहेगा खास फोकस
प्रो. राजीव मनोहर ने विश्वविद्यालय में रिसर्च गतिविधियों को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उसके शोध कार्यों से होती है, इसलिए DSPMU में रिसर्च को और बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए ऐसे पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने की जरूरत है, जिनसे पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य सिर्फ डिग्री देना नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य को बेहतर बनाना भी होना चाहिए।
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