रांची. रांची स्थित CBI की विशेष अदालत ने कारोबारी राजीव झावर को बड़ी राहत देते हुए उनका पासपोर्ट वापस करने और 29 जुलाई से 25 अगस्त 2026 तक सिंगापुर, इटली और फ्रांस की यात्रा की अनुमति दे दी है. हालांकि अदालत ने यह अनुमति कई सख्त शर्तों के साथ दी है.
मां के इलाज और कारोबारी बैठक का दिया हवाला
CBI के विशेष न्यायाधीश-II की अदालत में दायर आवेदन में राजीव झावर ने कहा कि उन्हें अपनी 85 वर्षीय मां शांति देवी झावर के इलाज के सिलसिले में सिंगापुर जाना है. उनकी मां वर्ष 2022 से गर्भाशय कैंसर और वर्ष 2025 से ब्लड कैंसर से पीड़ित हैं. उनका इलाज सिंगापुर में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है. झावर ने अदालत को बताया कि वह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे हैं और इस कठिन समय में उनकी मौजूदगी इलाज और देखभाल के लिए जरूरी है. उनके पिता की उम्र भी करीब 90 वर्ष है.
आवेदन में यह भी कहा गया कि वह एक कारोबारी हैं और अपनी कंपनी के वैश्विक कारोबार की जिम्मेदारी संभालते हैं. इटली स्थित कंपनी के ग्लोबल डेवलपमेंट सेंटर में 3 अगस्त से 10 अगस्त के बीच होने वाली रणनीतिक समीक्षा बैठक में उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक है. इस बैठक में वैश्विक विस्तार, तकनीकी विकास और भविष्य की कारोबारी योजनाओं पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने हैं. इसके बाद वह फ्रांस में अपनी छोटी बेटी से भी मुलाकात करेंगे.
अदालत ने कई शर्तों के साथ दी राहत
सुनवाई के दौरान CBI के विशेष लोक अभियोजक ने आवेदन का विरोध करते हुए विदेश प्रवास की अवधि और मुकदमे में देरी की आशंका जताई. हालांकि अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि राजीव झावर को 19 फरवरी 2025 को जमानत मिल चुकी है और उन्होंने अदालत के निर्देशानुसार 8 मई 2026 को अपना पासपोर्ट जमा कर दिया था. अदालत ने यह भी माना कि अब तक उन्होंने जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है.
इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने पासपोर्ट जारी करने और विदेश यात्रा की अनुमति दे दी. अदालत ने निर्देश दिया कि भारत लौटने के पांच दिनों के भीतर राजीव झावर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर अपना पासपोर्ट फिर से जमा करेंगे. उन्हें भारत स्थित किसी अचल संपत्ति का मूल दस्तावेज अदालत में जमा करना होगा.
यात्रा से पहले टिकट, वीजा, पूरा यात्रा कार्यक्रम और सक्रिय मोबाइल नंबर अदालत तथा जांच अधिकारी को उपलब्ध कराना होगा. विदेश प्रवास के दौरान उनके वकील अदालत में उनकी ओर से उपस्थित रहेंगे. यदि इस अवधि में आरोप तय करने की सुनवाई होती है तो उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होना होगा.
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें केवल सिंगापुर, इटली और फ्रांस की यात्रा की ही अनुमति होगी और सामान्य परिस्थितियों में यात्रा अवधि बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

