भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम आगामी 2026 FIH हॉकी वर्ल्ड कप में अपनी पारंपरिक नीली जर्सी की जगह भगवा/ऑरेंज रंग की प्राथमिक जर्सी पहनकर मैदान पर उतरेगी. दोनों टीमों की नई जर्सी 27 जुलाई को सामने आई थी और वर्ल्ड कप में इसका प्रतिस्पर्धी इस्तेमाल होगा. टूर्नामेंट 14 अगस्त से महिला और 15 अगस्त से पुरुष वर्ग के मुकाबलों के साथ शुरू होगा.
जर्सी का रंग बदलने के फैसले के बाद इस पर बहस शुरू हो गई है. पूर्व भारतीय कप्तान और ओलंपियन विरन रसक्विन्हा ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे “embarrassing” यानी “शर्मनाक” बताया है. वहीं Hockey India ने कहा है कि यह फैसला राजनीतिक नहीं, बल्कि तकनीकी जरूरतों और खिलाड़ियों की राय के आधार पर लिया गया है.
नीले टर्फ पर विजिबिलिटी बनी जर्सी बदलने की वजह
Hockey India के मुताबिक, आधुनिक ब्लू सिंथेटिक टर्फ पर नीली जर्सी का रंग मैदान के साथ मिल जाता था. इससे तेज गति वाले मुकाबलों के दौरान खिलाड़ियों के लिए अपने साथियों को पहचानना और मैदान पर विजिबिलिटी बनाए रखना मुश्किल हो रहा था. इसी तकनीकी समस्या को देखते हुए जर्सी का रंग बदलने पर विचार किया गया.
Hockey India ने बताया कि खिलाड़ियों, कोच और सपोर्ट स्टाफ के साथ विस्तार से चर्चा की गई. इस दौरान पीले और भगवा/ऑरेंज रंग को संभावित विकल्प के तौर पर देखा गया. अंत में खिलाड़ियों और टीम की राय के आधार पर भगवा रंग चुना गया. संगठन का कहना है कि भगवा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रंगों में शामिल है और इसे साहस, बलिदान और राष्ट्रीय गौरव से भी जोड़ा जाता है.
भारत पहले भी बदल चुका है जर्सी का रंग
Hockey India ने जर्सी के रंग में बदलाव को लेकर कहा है कि यह भारतीय हॉकी में पहली बार नहीं हो रहा है. भारतीय टीम इससे पहले भी अलग-अलग रंग की जर्सी में बड़े टूर्नामेंट खेल चुकी है. संगठन के मुताबिक, 2014 FIH हॉकी वर्ल्ड कप में भारत ने पीले रंग की जर्सी पहनी थी, जबकि 2018 वर्ल्ड कप में टीम स्काई ब्लू रंग की जर्सी में उतरी थी.
यानी टीम इंडिया की जर्सी का रंग पहले भी बदला गया है. हालांकि, 2026 वर्ल्ड कप के लिए पारंपरिक नीले रंग की जगह भगवा/ऑरेंज को प्राथमिक जर्सी के तौर पर चुनने से इस बार विवाद ज्यादा गहरा गया है.
विरन रसक्विन्हा ने जताई नाराजगी, बोले- ‘शर्मनाक’
जर्सी के रंग में बदलाव पर पूर्व भारतीय कप्तान और ओलंपियन विरन रसक्विन्हा ने सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि Hockey India ने कई अच्छे काम किए हैं, लेकिन जर्सी के रंग को लेकर उन्होंने इसे “embarrassing” यानी “शर्मनाक” बताया.
रसक्विन्हा ने कहा कि भारतीय टीम की विरासत और पहचान हमेशा नीले रंग से जुड़ी रही है और उन्होंने कई वर्षों तक गर्व के साथ नीली जर्सी पहनी. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रशंसक भारतीय टीम को नीले रंग में देखना चाहते हैं, फिर ऑरेंज रंग चुनने के पीछे तर्क क्या है. बाद में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति राजनीतिक नहीं, बल्कि भारतीय हॉकी की पहचान और परंपरा से जुड़ी है.
Hockey India की सफाई- फैसला राजनीतिक नहीं
विरन रसक्विन्हा की प्रतिक्रिया के बाद Hockey India ने जर्सी के रंग में बदलाव को राजनीतिक फैसले के तौर पर देखे जाने से इनकार किया है. संगठन का कहना है कि रंग बदलने का फैसला खिलाड़ियों, कोच और सपोर्ट स्टाफ की सलाह के बाद लिया गया और इसका मुख्य कारण मैदान पर बेहतर विजिबिलिटी है.
Hockey India के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने भी कहा कि वह खुद भारतीय टीम के लिए नीली जर्सी पहन चुके हैं, लेकिन जर्सी का रंग पहले भी बदला गया है. उनके मुताबिक, ब्लू टर्फ पर नीली जर्सी के कारण खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ को विजिबिलिटी की समस्या महसूस हुई थी. इसी वजह से नए रंग की जरूरत सामने आई.
Hockey India के अनुसार, 2026 वर्ल्ड कप में भगवा/ऑरेंज जर्सी टीम की प्राथमिक जर्सी होगी, जबकि सफेद रंग की जर्सी को सेकेंडरी किट के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा. संगठन ने यह भी कहा है कि वर्ल्ड कप के बाद खिलाड़ियों के फीडबैक के आधार पर जर्सी के रंग में फिर बदलाव किया जा सकता है.
Hockey India के लिए यह फैसला तकनीकी जरूरत और खिलाड़ियों की राय पर आधारित है. संगठन का तर्क है कि नीली जर्सी और नीले टर्फ के बीच रंगों की समानता से विजिबिलिटी प्रभावित हो रही थी. वहीं, आलोचकों के लिए सवाल यह है कि भारतीय हॉकी की लंबे समय से चली आ रही नीली पहचान को बदलने की आखिर कितनी जरूरत थी?

