गिरिडीह पुलिस ने नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता हासिल करते हुए 25 लाख रुपये के इनामी नक्सली अजय महतो उर्फ टाइगर उर्फ बासुदेव को गिरफ्तार कर लिया है. कुख्यात नक्सली और मिसिर बेसरा का करीबी सहयोगी माना जाने वाला अजय महतो बीती रात हरलाडीह इलाके से पकड़ा गया. वह गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के नावाडीह गांव का रहने वाला है.
नक्सली अजय महतो के बारें में आईबी को गुप्त सूचना मिली थी और उसके बाद झारखंड़ पुलिस और सीआरपीएफ से आईबी के द्वारा सूचना साझा की गयी. जिसके बाद गठित विशेष टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर हरलाडीह स्थित करमू मांझी के घर में छापेमारी की. कार्रवाई के दौरान पुलिस ने वहां छिपे अजय महतो उर्फ टाइगर को गिरफ्तार कर लिया. उसके साथ मौजूद दो अन्य नक्सलियों को भी हिरासत में लिया गया है. फिलहाल तीनों से पुलिस की विशेष टीम पूछताछ कर रही है.
तीन राज्यों की पुलिस कर रही थी तलाश
अजय महतो भाकपा माओवादी का स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य और पारसनाथ क्षेत्र का जोनल कमांडर रह चुका है. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ हत्या, लूट, लेवी वसूली, पुलिस पर हमला, आईईडी विस्फोट और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत 100 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं.

उसने गिरिडीह, बोकारो, धनबाद और हजारीबाग के सीमावर्ती इलाकों में कई नक्सली वारदातों को अंजाम दिया. पुलिस टीमों पर घात लगाकर हमला करना, सड़क निर्माण कार्य में लगे वाहनों को आग के हवाले करना और ठेकेदारों से रंगदारी वसूलना उसकी पहचान रही है. झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा की पुलिस भी लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी.
टाइगर की गिरफ्तारी नक्सलियों के लिए बड़ा झटका
गिरिडीह उपायुक्त पहले ही अजय महतो समेत 12 नक्सलियों के खिलाफ देशद्रोह और यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की अनुशंसा राज्य सरकार से कर चुके हैं, जिसे गृह विभाग से मंजूरी भी मिल चुकी है. गिरफ्तारी के बाद जिले में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है. एसपी डॉ. बिमल कुमार ने कहा कि टाइगर की गिरफ्तारी नक्सली संगठन के लिए बड़ा झटका है. उन्होंने कहा कि पुलिस का अभियान आगे भी जारी रहेगा और बचे हुए नक्सलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
बता दें, लंबे समय से सारंडा में चल रहे नक्सलियों के खिलाफ बड़े एक्शन से शेष बचे नक्सली भागकर दूसरे जगहों में सुरक्षित ठिकाना बना रहे है. जिसका परिणाम है कि नक्सलियों की गिरफ्तारी होना अब शुरू हो चुकी है. नक्सलियों के लिए असुरक्षित जगह होने के कारण झारखंड पुलिस को सफलता मिल रही है.
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