जोहार लाइव ब्यूरो
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने तलाक के बाद आर्थिक सुरक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही एक महिला के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने टाटा मोटर्स में कार्यरत उसके पति को पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ते के रूप में 20 लाख रुपये देने का आदेश दिया है. यह राशि 12 महीने के भीतर चार बराबर किस्तों में चुकानी होगी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी के पास अपनी आजीविका चलाने का कोई स्वतंत्र साधन नहीं है, इसलिए उसके भविष्य और सम्मानजनक जीवन को ध्यान में रखते हुए उचित आर्थिक सुरक्षा देना जरूरी है.
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया. मामला जमशेदपुर की रीना देवी और उनके पति मिथिलेश कुमार से जुड़ा है. पति टाटा मोटर्स में कार्यरत हैं. हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को बरकरार रखते हुए स्थायी गुजारा भत्ते की राशि में बदलाव किया है.
2003 में हुई थी शादी, 2016 में मिला तलाक
मामले के अनुसार, रीना देवी और मिथिलेश कुमार की शादी 23 फरवरी 2003 को जमशेदपुर में हुई थी. शादी के बाद दोनों के रिश्तों में विवाद शुरू हो गया. पति ने पत्नी पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(i-a) के तहत तलाक की याचिका दायर की थी.
जमशेदपुर फैमिली कोर्ट ने 22 अप्रैल 2016 को पति के पक्ष में तलाक की डिक्री पारित कर दी. इस फैसले को रीना देवी ने झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी. सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता से समझौते की कोशिश भी हुई, लेकिन बात नहीं बनी.
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान महिला की ओर से बताया गया कि उनके पति दूसरी शादी कर चुके हैं. ऐसे में अब वैवाहिक संबंध दोबारा बहाल होने की संभावना नहीं है और विवाद का मुख्य मुद्दा स्थायी गुजारा भत्ता रह गया है.
पति की सैलरी 47 हजार, हाथ में आते हैं 34 हजार रुपये
हाईकोर्ट ने पति की वास्तविक आय और आर्थिक जिम्मेदारियों का आकलन करने के लिए उनकी सैलरी से जुड़े दस्तावेज मंगवाए. टाटा मोटर्स ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया कि जुलाई 2026 में मिथिलेश कुमार का मासिक सकल वेतन 47,498.18 रुपये था, जबकि कटौती के बाद उन्हें 34,372.18 रुपये मिलते थे. उनकी अनुमानित वार्षिक सकल आय करीब 6.01 लाख रुपये बताई गई.
पति ने कोर्ट को बताया कि उनके नाम पर कोई मकान नहीं है और वह अपनी मां के साथ पैतृक घर में रहते हैं. उनकी मां की उम्र 79 वर्ष है और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी उन पर है. दूसरी ओर, पत्नी की ओर से कहा गया कि उनके पास अपनी आजीविका चलाने के लिए कोई स्वतंत्र आय नहीं है.
3 हजार रुपये का गुजारा भत्ता अपर्याप्त
हाईकोर्ट ने पाया कि पहले फैमिली कोर्ट ने पत्नी को 3,000 रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था. लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह रकम पर्याप्त नहीं है. कोर्ट ने कहा कि स्थायी गुजारा भत्ता तय करते समय पति की आय, पत्नी की जरूरतों, दोनों की सामाजिक स्थिति, पति की अन्य जिम्मेदारियों और भविष्य में बढ़ने वाली महंगाई को ध्यान में रखना जरूरी है.
अदालत ने स्पष्ट किया कि गुजारा भत्ता तय करने के लिए कोई एक निश्चित गणितीय फार्मूला नहीं हो सकता. इसका उद्देश्य पति को दंडित करना नहीं, बल्कि वैवाहिक संबंध टूटने के बाद आर्थिक रूप से निर्भर जीवनसाथी को असहाय होने से बचाना है.
12 महीने में चार किस्तों में देना होगा पैसा
सभी तथ्यों और पति की भुगतान क्षमता पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने पत्नी के लिए 20 लाख रुपये की एकमुश्त स्थायी गुजारा भत्ता राशि तय की. आदेश के मुताबिक, पति को यह रकम 12 महीने के भीतर चार बराबर किस्तों में देनी होगी. पहली किस्त आदेश की तारीख से दो महीने के भीतर चुकानी होगी.
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि निर्धारित समय के अनुसार राशि पत्नी के खाते में जमा नहीं होती है, तो वह कानून के अनुसार उचित अदालत का दरवाजा खटखटा सकती हैं.

