किसलय शानू
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा-2023 के पेपर लीक मामले में एसआईटी (SIT) की जांच ने एक बेहद चौंकाने वाला और संगठित रैकेट का पर्दाफाश किया है. केस के अनुसंधान में आये तथ्यों और आरोपी के बयान से एसआईटी को पता चला है ki स परीक्षा घोटाला केवल कुछ लोगों की व्यक्तिगत मिलीभगत तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक सुनियोजित और बड़े पैमाने पर चलाया गया आपराधिक षड्यंत्र था.
दुर्गापुर के एक क्वार्टर में बना था ‘सेफ हाउस’
जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी दिलीप कुमार पासवान इस पूरे रैकेट में सिर्फ एक परीक्षार्थी या लाभार्थी नहीं था, बल्कि वह इस धांधली में एक मध्यस्थ (इंटरमीडियरी/एजेंट) के रूप में सक्रिय था।.उसने मुख्य आरोपी दिलीप यादव के निर्देश पर पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर स्थित सितुलपुर इलाके में एक क्वार्टर की व्यवस्था की थी.
इस ‘सेफ हाउस’ नुमा ठिकाने पर परीक्षा से ठीक पहले लगभग 30 से 35 परीक्षकों/छात्रों को इकट्ठा किया गया था. आरोपी दिलीप कुमार पासवान खुद वहां मौजूद था और उसने अपनी देखरेख में इन उम्मीदवारों को लीक हुए प्रश्न-पत्र और उनके सटीक उत्तर रटवाए थे, ताकि वे परीक्षा में सफल हो सकें.
परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों की भी संलिप्तता
एसआईटी की जांच के दायरे में आरोपी का परिवार और करीबी रिश्तेदार भी आ गए हैं. आरोप है कि दिलीप कुमार पासवान ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए प्रभाकर शर्मा, उनकी पत्नी अस्मिता करुणा और बहन विजेता को इस एजेंट नेटवर्क से जोड़ा था.
परीक्षा के ठीक पहले आरोपी और उसकी पत्नी अस्मिता करुणा के बीच हुए व्हाट्सएप चैट से इस बात के अकाट्य सबूत मिले हैं कि वे लगातार लीक प्रश्न-पत्र, उत्तरों की रटंत और परीक्षा की तैयारियों पर चर्चा कर रहे थे.
मोबाइल नंबर (7063414831) की तकनीकी और लोकेशन जांच (CDR) से भी यह साबित हुआ है कि आरोपी परीक्षा के दौरान और उसके आसपास कई सफल व असफल उम्मीदवारों के लगातार संपर्क में था.

वित्तीय लेन-देन (Financial Trail) से खुला पैसों का खेल
इस पूरे मामले का सबसे मजबूत सुराग एसआईटी को वित्तीय जांच (Financial Trail) से मिला है.भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के खातों की छानबीन में बड़े पैमाने पर अवैध रकम के ट्रांसफर का खुलासा हुआ है:
शांति देवी (अभ्यर्थी प्रभाकर शर्मा की माता) के खाते से सितंबर/अक्टूबर 2024 के दौरान लगभग ₹6 लाख दिलीप कुमार पासवान के खाते में ट्रांसफर किए गए.
परीक्षा परिणाम आने के बाद, सफल अभ्यर्थी रामचरण सिंह गुर्जर के दोस्त देव नारायण गुर्जर के खाते से लगभग ₹3.50 लाख और खुद रामचरण सिंह गुर्जर के खाते से ₹1.50 लाख आरोपी के खाते में भेजे गए.
इसके अलावा, हरि सिंह गुर्जर से जुड़े लगभग ₹3 लाख के एक अन्य लेन-देन की भी गहन जांच चल रही है.
आरोपी के बैंक खाते से मुख्य संगठक माने जा रहे सह-आरोपी दिलीप यादव से जुड़ी संस्था या खाते में लगभग ₹1.30 लाख ट्रांसफर किए जाने के प्रमाण मिले हैं, जो यह साफ दर्शाते हैं कि इन दोनों के बीच आर्थिक संबंध गहरे थे.
कानून का शिकंजा और जमानत याचिका खारिज
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी के खिलाफ न केवल उसका अपना बयान, बल्कि व्हाट्सएप चैट, तकनीकी साक्ष्य, गवाहों के बयान और पुख्ता वित्तीय सबूत मौजूद हैं.

