केरलम में पिछले दिनों ओणम की खुशियां पूरे शबाब पर थीं. घरों में पकवान बन रहे थे, लोग नए कपड़ों की तैयारी में थे और हर तरफ त्योहार की रौनक दिखाई दे रही थी. इसी खुशी को बांटने के लिए पुलिस की एक टीम आदिवासी परिवारों को ओणम के सद्या भोज का निमंत्रण देने पहुंची.
लेकिन वहां बच्चों से जब पूछा गया कि सुबह क्या खाया है, तो जवाब मिला—कुछ नहीं. बस, यहीं से ओणम का न्योता देने पहुंची पुलिस की कहानी बदल गई. क्योंकि जिन परिवारों को त्योहार में खाना खिलाने के लिए बुलाया जा रहा था, वे कई दिनों से पेट भर खाना भी नहीं खा पा रहे थे.
क्या है पूरा मामला
यह मामला केरलम के पथानामथिट्टा जिले के मूझियार इलाके का है. कुछ दिन पहले यानी कि 23 अगस्त को मूझियार पुलिस की एक टीम अंगमूझी के पास किलियेरंजंकल्लू फॉरेस्ट चेक पोस्ट के नजदीक स्थित एक आदिवासी बस्ती में पहुंची थी.
पुलिस का मकसद बेहद सामान्य था. उन्हें बस्ती के लोगों को पुलिस स्टेशन में आयोजित होने वाले ओणम भोज यानी सद्या में शामिल होने का निमंत्रण देना था. इस बस्ती में चार परिवारों के कुल 17 लोग रहते हैं. पुलिस टीम में मूझियार के SHO ए.आर. रविंद्रन, SI अनिलकुमार, महिला CPO चिंचू बोस और CPO विनीत शामिल थे.
पुलिसकर्मी परिवारों से बातचीत कर रहे थे. इसी दौरान SHO ए.आर. रविंद्रन ने वहां मौजूद बच्चों से एक साधारण सा सवाल पूछा.
सुबह क्या खाया? लेकिन बच्चों का जवाब साधारण नहीं था.
बच्चों ने बताया कि उन्होंने उस सुबह कुछ नहीं खाया था. बातचीत आगे बढ़ी तो परिवारों ने पुलिसकर्मियों को बताया कि उनके घरों में कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है, जब उन्हें दिनों तक खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं मिलता. त्योहार का निमंत्रण लेकर पहुंचे पुलिसकर्मियों के सामने अचानक एक ऐसी सच्चाई आ गई, जिसके बारे में शायद उन्हें पहले कोई अंदाजा नहीं था.
निमंत्रण देने गए थे, मदद कर लौटे
पुलिस टीम ने यह सुनने के बाद सिर्फ सहानुभूति जताकर वहां से लौटना ठीक नहीं समझा. वे तुरंत पुलिस स्टेशन वापस पहुंचे और जरूरी सामान की व्यवस्था की. कुछ ही समय बाद पुलिसकर्मी दोबारा उसी आदिवासी बस्ती में पहुंचे. लेकिन इस बार उनके हाथों में सिर्फ ओणम भोज का निमंत्रण नहीं था. वे साथ लेकर आए थे परिवारों के लिए जरूरी राशन और खाद्य सामग्री. इनमें किराना का सामान, सब्जियां, मछली, बिस्कुट और अन्य बेकरी उत्पाद शामिल थे. यह सामान चारों परिवारों को दिया गया, ताकि ओणम के त्योहार तक उन्हें भूख की परेशानी का सामना न करना पड़े.
भूख के साथ बच्चों ने बताई स्कूल की परेशानी
इस मुलाकात के दौरान पुलिस को एक और गंभीर समस्या के बारे में पता चला. बस्ती के बच्चों ने बताया कि वे स्कूल जाना चाहते हैं, लेकिन उनके लिए स्कूल पहुंचना भी आसान नहीं है. इलाके में परिवहन की सुविधा नहीं होने के कारण बच्चों को आने-जाने में परेशानी होती है.
मूझियार पुलिस के अधिकारियों ने बच्चों और परिवारों को भरोसा दिलाया कि ओणम की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने पर बच्चों के लिए परिवहन की व्यवस्था करने की कोशिश की जाएगी.

जो पुलिस टीम वहां सिर्फ त्योहार का निमंत्रण देने पहुंची थी, उसके साथ उस दिन बस्ती के लोगों का रिश्ता कुछ अलग ही बन गया. पुलिसकर्मियों की मदद मिलने के बाद परिवारों ने उनका धन्यवाद किया और ओणम भोज में शामिल होने का भी भरोसा दिलाया.
पिछले दिनों केरलम से सामने आई यह कहानी सिर्फ पुलिस की मदद की कहानी नहीं है. यह उस संवेदनशीलता की कहानी है, जहां एक त्योहार का निमंत्रण अचानक भूखे लोगों तक मदद पहुंचाने का जरिया बन गया.
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