आनंद दत्त/किशलय शानू
जेपीएससी द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं को पास कराने के नाम पर छात्रों से वसूले गये पैसे से एल ख्यांगते और श्वेता कुमारी गुप्ता ने भी मौज- मस्ती की. तब एल ख्यांगते जेपीएससी में चेयरमैन के पद पर थे और श्वेता गुप्ता परीक्षा उप नियंत्रक के पद पर.
इस बात की जानकारी सीआइडी को केस के अनुसंधान के दौरान मिली है. क्योंकि मामले में टीडीपीएल कंपनी के निदेशक रामबीर सिंह ने अपने बयान में सीआइडी को बताया है कि जेपीएससी से सांठगांठ कर सभी घोटाले की राशि से ही टीडीपीएल कंपनी का संचालन किया जाता था.
घोटाले से अर्जित राशि से ही कंपनी के स्टाफ को वेतन दिया जाता था. इसके अलावा ऑफिस और निजी आवश्यकता से संबंधित सामानों की खरीददारी में पैसे खर्च किये जाते थे. घोटाले से प्राप्त पैसे इसलिए खर्च किये जाते थे. क्योंकि टेंडर के अनुसार किये गये कार्यों का पैसा कंपनी को अबतक नहीं मिला था.
टीडीपीएल कंपनी के निदेशक रामबीर सिंह ने अपने बयान में आगे बताया है कि चेयरमैन और श्वेता गुप्ता की कई निजी यात्रा तथा अन्य खर्च का वहन कंपनी के द्वारा किया जाता था.
जबकि पूरे मामले में उस्मान ने सीआइडी को बताया कि रामबीर सिंह द्वारा परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और उनके परिजनों का माह जनवरी 2026 से लेकर जून 2026 तक कुल मिलाकर तीन बार रांची से दिल्ली एवं बेंगलुरू आने- जाने का एयर टिकट बनवाया गया था.
मैंने टिकट अपने आइडी से मेक माइ ट्रिप के माध्यम से कराया था. इसका भुगतान मैंने क्रेडिट कार्ड से किया था. टिकट बनवाने में करीब 1.50 लाख रुपये खर्च हुआ था. इस पैसे को बाद में रामबीर सिंह के द्वारा मुझे भुगतान किया गया था.
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जबकि मामले में सीआइडी की नजर में पूरे केस के मास्टरमाइंड अभय तिवारी ने बताया है कि मेरे द्वारा मार्केट के उपलब्ध कराये गये छात्रों से उगाही किये गये पैसे से कभी- कभी मेक माइ ट्रिप से रामबीर, उस्मान और सत्यपाल का टिकट बुक किया जाता था. मैंने उस्मान के खाते में रामबीर के कहने पर सैलरी के नाम पर दो लाख रुपये अपने अकाउंट से उस्मान के एकाउंट में पैसे ट्रांसफर किये थे.

इधर, श्वेता ने कहा मैं खुद करती थी टिकट के पैसे का भुगतान
रामबीर सहित अन्य के बयान के आधार पर सीआइडी ने श्वेता कुमारी गुप्ता से भी पूछताछ की है. श्वेता ने अपने बयान में इस बात की जानकारी दी है कि टीडीपीएल के पास एक प्रिवलेज कार्ड था. इस कार्ड का प्रयोग करने के कारण अंतिम समय में टिकट रद्द होने पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता था. इसी सुविधा का उपयोग करते हुए मैंने अपनी मां और पति के कुछ हवाई यात्रा की टिकट टीडीपीएल के माध्यम से बुक करायी थी. टिकट के पैसे का भुगतान बाद में मैंने कर दिया था.
हालांकि, पूरे मामले में सीआइडी की जांच से अब यह तथ्य स्पष्ट हो सकता है कि आखिर पूरे मामले में कितनी सच्चाई है. सीआइडी इस पूरे मामले में सबूत एकत्र करने के लिए यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दोनों अधिकारियों ने अपने पद पर रहते हुए कंपनी के पैसे से कितनी बार यात्रा की. अपने निजी कार्य के लिए कितने पैसे खर्च किये.
इसके लिए सीआइडी बैंक ट्रांजेक्शन, ट्रेवल एजेंसी सहित अन्य लोगों से जानकारी एकत्र करने का प्रयास करेगी, ताकि न्यायालय में अधिकारियों के इस कारनामे से संबंधित सबूत पेश किये जा सकें. उल्लेखनीय है कि पूर्व की जांच में एजेंट सहित अन्य लोगों के माध्यम से अभी तक सीआइडी की जांच में करीब 15 करोड़ रुपये वसूली से संबंधित तथ्य मिल चुके हैं.


