जोहार लाइव ब्यूरो
सीआईडी के सामने पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपी मो. एबाद ने कई चौंकानेवाला और नया खुलासा किया है. खुलासे के मुताबिक जेपीएससी में परीक्षा उप-नियंत्रक के पद पर रही श्वेता पहले जिन आरोपों से खुद को बाहर रखा, एबाद ने उससे संबंधित जानकारी सीआईडी को दी है.
एबाद के स्वीकारोक्ति बयान के अनुसार, श्वेता एवं अभय के निर्देश पर एजेंट अभ्यर्थियों से मिलते थे. इसके बाद एजेंट से सेटिंग होने पर ओएमआर एवं ओएसएम में टेंपरिंग और मैनिपुलेशन का काम होता था.
मूलतः यूपी के अयोध्या जिले के रोनाही गांव के रहनेवाले मो. एबाद ने बताया है कि मैं जुलाई 2023 में पिकार टेक्नोलॉजी प्रालि में टेक्निकल सपोर्ट के रूप में काम कर रहा था. वहां वेतन के तौर पर मुझे मात्र 12,500 रुपए मिलते थे, जो कम था. इसके बाद पिकार टेक्नोलॉजी प्रालि के निदेशक मो. उस्मान जो टीडीपीएल कंपनी जेपीएससी ऑफिस रांची में टेक्निकल सपोर्ट इंजीनियर का काम करते थे, के द्वारा बताया गया कि टीडीपीएल के प्रोजेक्ट पर हेल्प डेस्क का काम है, जहां मुझे 18,000 रुपए प्रतिमाह मिलेगा, इस वजह से मैं काम करने के लिए तैयार हो गया.
टीडीपीएल कंपनी झारखंड में प्रतियोगिता परीक्षा कंडक्ट कराती है. मैं सितंबर 2025 में टीडीपीएल कंपनी जेपीएससी ऑफिस रांची आया और टेक्निकल सपोर्ट के रूप में काम कर रहा था. मेरा काम एस्पिरेंट से फॉर्म भरने में कोई गलती या असुविधा होती थी, तब मैं उसमें मदद करता था. मैं मो. उस्मान के कहने पर उनके काम में सहयोग करता था. मो. उस्मान प्रतियोगिता परीक्षा में पैसे लेकर गड़बड़ी करता था. उस्मान के द्वारा मुझे अधिकांश वेतन नगद दिया जाता था. कभी-कभी मांगने पर या जरूरत के हिसाब से, मेरे बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते में पैसा ट्रांसफर किया जाता था.
मुझे टीडीपीएल कंपनी में काम करने के लिए कोई ज्वाइनिंग लेटर नहीं दिया गया था. ओएमआर का कार्य प्रदीप द्वारा किया जाता था, जबकि ओएसएम का काम हेमंत वर्मा के द्वारा किया जाता था. जिसमें इस सिस्टम को डेवलप भी किया था. ओएमआर और ओएसएम में टेंपरिंग तथा मैनिपुलेशन का कार्य हेमंत वर्मा और संजय मिलकर करते थे. संजय अभय तिवारी के निरंतर संपर्क में रहता था, तथा श्वेता के साथ समन्वय स्थापित कर अभय और श्वेता संबंधित अभ्यर्थियों के बीच संपर्क अर्थात लाइजनिंग का कार्य करता था.
एजेंट श्वेता और अभय तिवारी के निर्देश पर ही संबंधित अभ्यर्थियों से मिलते थे और आवश्यक समन्वय स्थापित किया जाता था. जब टेंपरिंग और मैनिपुलेशन का कार्य किया जाता था, उस दौरान रामवीर सिंह और सतपाल की तकनीकी टीम बाहर से आती थी.
इस संपूर्ण प्रक्रिया की मॉनिटरिंग और सुपरवाइजरी की जिम्मेवारी मो. उस्मान के पास थी.
पिछली एक्सक्लूसिव रिपोर्टों में खुल चुका है जेपीएससी के गड़बड़ी नेटवर्क का राज
जोहार लाइव ने अपनी पिछली एक्सक्लूसिव रिपोर्टों में पहले ही जेपीएससी परीक्षा में कथित गड़बड़ी के नेटवर्क की कई परतों का खुलासा किया था. पार्ट-1 में अभय तिवारी के स्वीकारोक्ति बयान के आधार पर टीडीपीएल को जेपीएससी में काम मिलने और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कथित नेटवर्क की जानकारी सामने आई थी.
वहीं, एक्सक्लूसिव पार्ट-4 में यह सामने आया था कि संजय अभय तिवारी और श्वेता के संपर्क में रहकर अभ्यर्थियों के साथ लाइजनिंग का काम करता था. इसी रिपोर्ट में रामवीर सिंह के बयान के हवाले से ओएमआर स्कैनिंग, ओएमआर में हेरफेर और ओएसएम से जुड़े कामों की जानकारी तथा कथित धांधली में शामिल लोगों की भूमिकाओं का जिक्र किया गया था.

अब मो. एबाद का नया बयान उसी कड़ी को आगे बढ़ाता है. एबाद ने सीआईडी के सामने कथित तौर पर बताया है कि श्वेता और अभय के निर्देश पर एजेंट संबंधित अभ्यर्थियों से मिलते थे और इसके बाद सेटिंग होने पर ओएमआर एवं ओएसएम में टेंपरिंग और मैनिपुलेशन का काम किया जाता था. यानी जोहार लाइव की पिछली रिपोर्टों में सामने आए अभय-श्वेता-संजय और तकनीकी टीम के कथित नेटवर्क में अब एबाद के बयान से एजेंटों की भूमिका को लेकर एक नई कड़ी जुड़ती दिख रही है.
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