क्या नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अस्थि अवशेष अब भारत आएंगे? नेताजी के निधन के बाद उनके अस्थि अवशेषों को लेकर दशकों से सवाल उठते रहे हैं. अब यह मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है.
नेताजी की बेटी अनीता बोस फाफ ने जापान में रखे नेताजी के कथित अस्थि अवशेषों को भारत लाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिका का नाम “ANITA B. PFAFF Vs UNION OF INDIA AND ORS.” है और इसे W.P.(C) No. 842/2026 के तौर पर दर्ज किया गया है.
मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दूसरे संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है. अब इस मामले में केंद्र के जवाब का इंतजार है.
क्या है पूरा मामला?
जापान की राजधानी टोक्यो स्थित रेंकोजी मंदिर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अस्थि अवशेष रखे होने की बात कही जाती है.
अनीता बोस फाफ की मांग है कि भारत सरकार जापान सरकार के साथ बातचीत करे और इन कथित अस्थि अवशेषों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू करे. इसके लिए याचिका में एक अंतर-मंत्रालयी समिति गठित करने की मांग की गई है. साथ ही, अवशेषों को भारत लाने के लिए एक समयबद्ध योजना तैयार करने की मांग भी की गई है.
याचिका में यह भी कहा गया है कि जब तक इस मामले पर कोई अंतिम फैसला नहीं होता, तब तक रेंकोजी मंदिर में रखे कथित अवशेषों की मौजूदा स्थिति को सुरक्षित रखा जाए. इसके लिए जापानी अधिकारियों के साथ आधिकारिक स्तर पर बातचीत करने की मांग की गई है.
सुप्रीम कोर्ट में किसने रखा पक्ष?
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने की. इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे. अनीता बोस फाफ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में उनका पक्ष रखा.
पहले भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे आशीष रे
इस मामले में इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा चुका है. नेताजी के ग्रैंड-नेफ्यू आशीष रे भी इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. हालांकि, उस समय उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं हुई थी. उस वक्त कोर्ट के सामने यह बात रखी गई थी कि अनीता बोस फाफ नेताजी की एकमात्र उत्तराधिकारी हैं और वह उस याचिका में शामिल नहीं थीं.
इसके बाद कहा गया था कि अनीता बोस फाफ खुद इस मामले में याचिका दाखिल करेंगी. अब अनीता बोस फाफ की ओर से याचिका दाखिल किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर दिया है.
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम इंतजार केंद्र सरकार के जवाब का है. केंद्र का जवाब सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई और कार्रवाई की दिशा तय कर सकता है.
यानी नेताजी के कथित अस्थि अवशेषों को जापान से भारत लाने की मांग अब देश की सर्वोच्च अदालत के सामने है. आने वाले दिनों में केंद्र सरकार का रुख इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभा सकता है.



