मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई करेगा. वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मंगलवार को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ के सामने मामले को जल्द सूचीबद्ध करने की मांग की थी. कोर्ट ने मामले को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दे दी.
मामला चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया और इस सवाल से जुड़ा है कि क्या आयोग की सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त कर सकते हैं. याचिका में ज्ञानेश कुमार को CEC के पद पर काम करने से अंतरिम रूप से रोकने और आयोग के अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की मांग की गई है.
14 फैसलों पर चुनाव आयुक्तों की आपत्ति का दावा
याचिका में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 14 मामलों में लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं. इनमें मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची में बदलाव, SIR और चुनावी डेटा से जुड़े फैसले शामिल बताए गए हैं.
याचिकाकर्ता का कहना है कि इन आपत्तियों के बावजूद कुछ फैसले चुनाव आयोग के सभी सदस्यों की मंजूरी के बिना लागू किए गए. याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए कहा गया है कि चुनावों की निगरानी, दिशा और नियंत्रण की शक्ति ‘Election Commission’ में निहित है, केवल CEC में नहीं.
Form-6 और SIR पर भी सवाल
याचिका में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में कथित बदलाव का भी मुद्दा उठाया गया है. इसमें SIR की पिछली मतदाता सूची में आवेदक, उसके माता-पिता या दादा-दादी के नाम से जुड़ी जानकारी मांगे जाने पर सवाल उठाया गया है.
इसके अलावा ECINet और ERONet जैसे चुनावी डेटा सिस्टम, मतदाता डेटा को केंद्रीकृत करने और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर भी याचिका में सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता ने संबंधित फाइल नोटिंग, बैठक के मिनट्स, मंजूरी और डिजिटल रिकॉर्ड अदालत के सामने पेश करने की मांग की है.
ज्ञानेश कुमार को CEC के तौर पर काम करने से रोकने की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि ज्ञानेश कुमार को CEC के तौर पर काम करने से अंतरिम रूप से रोका जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि चुनाव आयोग में निहित सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल अकेले CEC नहीं कर सकते.
याचिकाकर्ता ने कथित फैसलों की जांच के लिए स्वतंत्र जांच की मांग भी की है. साथ ही क्वो वारंटो रिट के जरिए ज्ञानेश कुमार से यह बताने को कहा गया है कि उन्होंने आयोग की सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल किस अधिकार के तहत किया.
चुनाव आयोग ने इन आरोपों से अलग रुख रखा है. आयोग का कहना है कि उसके फैसले सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं और SIR से जुड़े आदेशों व कार्यक्रमों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई थी. आयोग ने आंतरिक टिप्पणियों और आपत्तियों को अंतिम फैसले से अलग करके देखने की बात कही है.
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